लोकतांत्रिक विरोध में अपशब्दों की कोई जगह नहीं, प्रशासन की चुप्पी पर भी उठे सवाल
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा गत दिवस गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरखनाथ मंदिर के महंत योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध कथित रूप से अपशब्दों का प्रयोग किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार एवं अधिवक्ता रत्नाकर सिंह ने इस घटना को अत्यंत निंदनीय बताते हुए स्थानीय प्रशासन से मामले का स्वतः संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
सिंह ने आज एक प्रेस वार्ता में कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और राजनीतिक विरोध करने का अधिकार है। सरकार और जनप्रतिनिधियों की आलोचना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन आलोचना के नाम पर अपशब्दों और अमर्यादित भाषा का प्रयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध केवल चर्चा में आने अथवा राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से अपशब्दों का प्रयोग न तो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है और न ही सभ्यता के दायरे में आता है।
उन्होंने कहा कि नेहा बोरा उच्च शिक्षा प्राप्त महिला हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच से इस प्रकार की भाषा का प्रयोग एक गलत राजनीतिक एवं सामाजिक परंपरा को जन्म दे सकता है। श्री सिंह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के गृह नगर गोरखपुर में मुख्यमंत्री के विरुद्ध इस प्रकार की भाषा का प्रयोग किए जाने से यह सवाल भी उठता है कि क्या यह पूर्वांचल में चर्चा का विषय बनने की रणनीति का हिस्सा था।
सिंह ने बताया कि गोरखपुर के सिविल लाइंस स्थित एक अतिथि गृह में आयोजित जेन जी महाजुटान के गोरखपुर चरण में युवाओं की बेरोजगारी, पेपर लीक और असंतोष जैसे मुद्दों पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में नेहा बोरा को संबोधित करना था। इसके लिए चार सितंबर को अतिथि गृह बुक कराया गया था, लेकिन 13 सितंबर तक प्रशासन की ओर से कार्यक्रम को अनुमति नहीं दिए जाने की बात सामने आई थी।
उन्होंने कहा कि 14 सितंबर को आयोजित यह कार्यक्रम प्रशासन की अनुमति अथवा सहमति से हुआ था या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, जब कार्यक्रम चल रहा था और मंच से कथित रूप से अपशब्दों का प्रयोग किया जा रहा था, तब माइक की आवाज वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों, जवानों और प्रशासनिक अधिकारियों तक निश्चित रूप से पहुंच रही होगी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि प्रशासनिक अमले ने सार्वजनिक रूप से की जा रही इस आपत्तिजनक भाषा पर तत्काल आपत्ति क्यों नहीं जताई।
श्री सिंह ने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि क्या उक्त कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति दी गई थी। यदि अनुमति नहीं दी गई थी तो कार्यक्रम आयोजित कैसे हुआ। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पूरे मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि कानून का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीआई (एमएल) से प्रभावित आइसा संगठन पूर्वांचल के युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक एवं सांगठनिक स्थिति मजबूत करने के प्रयास में जुटा है। हाल के दिनों में नई दिल्ली के जंतर मंतर पर जेन जी से जुड़े प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आई नेहा बोरा को संगठन द्वारा प्रमुख चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि इस घटना से योगी आदित्यनाथ के समर्थकों में भी आक्रोश है और संभव है कि इस मामले में कुछ लोगों की ओर से कानूनी कार्रवाई की जाए। लेकिन उनका कहना था कि गोरखपुर जैसे शहर में, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह नगर भी है, सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री के विरुद्ध कथित रूप से अपशब्दों के प्रयोग की घटना पर प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध की अपनी मर्यादा होती है। राजनीतिक मतभेद और आलोचना लोकतंत्र की शक्ति हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कार्यक्रम को अनुमति मिली थी या नहीं और यदि सार्वजनिक मंच से कानून का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए।




































