छात्रवृत्ति के साथ करियर मार्गदर्शन भी, पवन कुमार ओझा की पहल से जुड़ रहे अन्य पूर्ववर्ती छात्र
टाटा स्टील, आदित्य बिड़ला समूह और यामाहा मोटर्स में काम कर रहीं लाभार्थी
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
धनबाद के सिंदरी में बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), सिंदरी के पूर्ववर्ती छात्रों ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सराहनीय पहल की है। इस प्रयास के तहत छात्राओं को छात्रवृत्ति, आर्थिक सहायता और करियर संबंधी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, ताकि आर्थिक चुनौतियां उनकी पढ़ाई और भविष्य की राह में बाधा न बनें। यह पहल महिला सशक्तीकरण और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस पहल में BIT सिंदरी के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के 1989-1993 बैच के पूर्ववर्ती छात्र और जमशेदपुर चैप्टर में इस पहल के सचिव पवन कुमार ओझा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका प्रयास छात्राओं को आर्थिक सहयोग देने के साथ उन्हें शैक्षणिक और व्यावसायिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना भी है।
छात्रवृत्ति से करियर तक का सफर
इस पहल के तहत विभिन्न बैचों की छात्राओं को उनकी जरूरत के अनुसार आर्थिक सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया है। वर्ष 2015 बैच की मेटलर्जी शाखा की शिल्पा को इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन दिया गया। वहीं, वर्ष 2020 बैच की विद्युत अभियांत्रिकी स्नातक सीमा मंडल को पूर्ण आर्थिक सहायता और मार्गदर्शन मिला। वर्तमान में सीमा मंडल टाटा स्टील में कार्यरत हैं।
वर्ष 2025 बैच की केमिकल इंजीनियरिंग स्नातक संगीता कुमारी और सूचना प्रौद्योगिकी की स्नातक सौम्या साक्षी को प्रतिवर्ष 35 हजार रुपये की छात्रवृत्ति के साथ मार्गदर्शन प्रदान किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संगीता कुमारी आदित्य बिड़ला समूह और सौम्या साक्षी जापान की यामाहा मोटर्स में कार्यरत हैं।
इसी क्रम में, वर्ष 2024-2028 बैच की केमिकल इंजीनियरिंग की छात्रा रिया ओझा को भी प्रतिवर्ष 35 हजार रुपये की छात्रवृत्ति और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इस सहयोग का उद्देश्य उनकी शिक्षा जारी रखने और भविष्य में आत्मनिर्भर बनने की राह आसान करना है।
पूर्ववर्ती छात्रों ने भी बढ़ाए मदद के हाथ
पवन कुमार ओझा के प्रयासों से प्रेरित होकर जमशेदपुर चैप्टर के अन्य पूर्ववर्ती छात्र भी इस पहल से जुड़े हैं। इनमें अमित रॉय और एस. एस. रमन (1984 बैच), अतुल रॉय (1985 बैच), शशि प्रसाद (1987 बैच), डॉ. अनिल रे (1989 बैच) और श्याम भूषण (1996 बैच) शामिल हैं।
इन पूर्ववर्ती छात्रों के सामूहिक सहयोग से अलग-अलग स्नातक बैचों की छात्राओं को शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 के स्नातक बैच की चार, वर्ष 2023 की तीन, वर्ष 2024 की एक और वर्ष 2025 की एक छात्रा को इस पहल के तहत सहयोग मिला है।
संस्थान से जुड़ाव, समाज के प्रति जिम्मेदारी
BIT सिंदरी के पूर्ववर्ती छात्रों की यह पहल दर्शाती है कि संस्थान से जुड़ाव केवल शिक्षा पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने बाद आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी भी इसमें शामिल है। छात्रवृत्ति के साथ मार्गदर्शन मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि की छात्राओं को उच्च शिक्षा जारी रखने और अपने करियर के लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।
पूर्ववर्ती छात्रों का यह सामूहिक प्रयास शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व और महिला सशक्तीकरण की भावना को मजबूत करता है। साथ ही, यह संदेश भी देता है कि व्यक्तिगत स्तर पर शुरू की गई पहल सामूहिक सहयोग से व्यापक सामाजिक बदलाव का माध्यम बन सकती है।


































