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Tata Workers Union : पहले से मिल रही सुविधा को उपलब्धि बताने पर घिरे यूनियन अध्यक्ष!

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वर्ष 2019 के वेतन समझौते और 26 तारीख की बैठक के कार्यवृत्त ने उठाए सवाल

सेवानिवृत्त एनएस कर्मचारियों को पहले से मिल रही है चिकित्सा सुविधा

फिर किस फैसले का श्रेय ले रहा नेतृत्व?

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फतेह लाइव, रिपोर्टर।

जमशेदपुर में टाटा वर्कर्स यूनियन के वर्तमान नेतृत्व की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मामला एनएस श्रेणी के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद चिकित्सा सुविधा देने से जुड़ा है। यूनियन के आधिकारिक व्हाट्सऐप समूह में अध्यक्ष की ओर से सचिव के माध्यम से प्रसारित संदेश में इस सुविधा को लेकर निर्णय होने की जानकारी दी गई। हालांकि, वर्ष 2019 के वेतन पुनरीक्षण समझौते की संबंधित पंक्तियों और 26 तारीख को हुई बैठक के कार्यवृत्त सामने आने के बाद इस दावे पर सवाल उठने लगे हैं।

अध्यक्ष को सम्मानित करते समर्थक

पहले से मिल रही सुविधा, फिर नई उपलब्धि का दावा क्यों?

यूनियन के आधिकारिक व्हाट्सऐप समूह में प्रसारित संदेश में कहा गया था कि यूनियन ने एनएस श्रेणी के कर्मचारियों को भी सेवानिवृत्ति के बाद चिकित्सा सुविधा देने के संबंध में उचित निर्णय लेने का अनुरोध किया था, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। संदेश में आगे दावा किया गया कि एनएस श्रेणी के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।

लेकिन इस संदेश के बाद कुछ समिति सदस्यों ने वर्ष 2019 के वेतन पुनरीक्षण समझौते की संबंधित पंक्तियां अपने समूह में साझा कीं। उनके अनुसार, समझौते में सभी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद चिकित्सा सुविधा जारी रखने का उल्लेख है। ऐसे में सवाल उठाया गया कि यदि यह सुविधा पहले से समझौते का हिस्सा थी, तो इसे नए निर्णय के रूप में प्रस्तुत करने का औचित्य क्या है?

दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों का भी दिया गया हवाला

कुछ समिति सदस्यों ने यह भी कहा कि एनएस श्रेणी के कर्मचारी पहले से ही इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं। उनके अनुसार, एनएस श्रेणी के दो कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उन्हें चिकित्सा सुविधा मिल रही है।

इस मुद्दे पर समूह में बहस उस समय और तेज हो गई, जब कुछ समिति सदस्यों ने अध्यक्ष की ओर से प्रसारित संदेश के दावे पर सवाल उठाए। इसके बाद 26 तारीख को हुई बैठक के कार्यवृत्त का हवाला देते हुए मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई।

बैठक के कार्यवृत्त से बढ़े सवाल

बैठक के कार्यवृत्त में प्रबंधन के हवाले से कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में एनएस श्रेणी के कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्हें ओएस श्रेणी के कर्मचारियों की तरह ही चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं और यह व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी।

कार्यवृत्त में दर्ज इस जानकारी के बाद विवाद का मुख्य प्रश्न यह बन गया है कि जब एनएस श्रेणी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पहले से ही चिकित्सा सुविधा मिल रही थी और प्रबंधन ने इसे जारी रखने की बात कही थी, तो इसे नए निर्णय के रूप में प्रचारित करने की जरूरत क्यों पड़ी?

यूनियन के कुछ समिति सदस्यों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा जारी है। अध्यक्ष के समर्थकों की ओर से किए गए दावे और बैठक के कार्यवृत्त में दर्ज जानकारी के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

समर्थकों की सूची भी चर्चा में

इस पूरे मामले में अध्यक्ष की प्रशंसा करते हुए संदेश साझा करने और कथित उपलब्धि के लिए धन्यवाद देने वाले कुछ समिति सदस्यों के नाम भी चर्चा में हैं। इसी बीच मामला हाथ से जाता देख अध्यक्ष समर्थको ने शाम 5:30 बजे अध्यक्ष को माला पहनाने का कार्यक्रम तैयार कर लिया। ग्रुप में आमंत्रण भेजा गया, पर शाम को कुल जमा 82 एनएस कमेटी मेंबर्स में से सिर्फ 11 कमिटी मेंबर्स ही पहुँचे और 11 पदाधिकारियों में सिर्फ 4, वो भी अध्यक्ष और डिप्टी प्रेसिडेंट सहित, इन दोनों के अलावा उपाध्यक्ष संजय सिंह और सहायक सचिव अजय चौधरी उपस्थित हुए।

ये प्रमुख निम्नलिखित नामों पर डालें एक नजर…

– कोक प्लांट डिपार्टमेंट से विभाष शुक्ला और विवेक कुमार सिंह
– फील्ड मैकेनिकल मेंटेनेंस से राजेश कुमार
– सिक्योरिटी डिपार्टमेंट से चंदन कुमार घोष और बृजेश पटेल
– लाइम प्लांट से हेमंत कुमार
– प्लानिंग डिवीजन से विमल कुमार
– स्पेयर्स में मैन्यूफैक्चरिंग से नीरज पाराशर
– इंजीनियरिंग सर्विसेज से बिजेंदर शाह
– फील्ड इलेक्ट्रिकल मेंटनेंस से श्याम सुंदर गोप
– जी ब्लास्ट फर्नेस से कुंदन कुमार

उपलब्धि के दावे पर पारदर्शिता की मांग

इस पूरे प्रकरण ने यूनियन के कामकाज और कर्मचारियों से जुड़े फैसलों की जानकारी साझा करने के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं। कर्मचारियों से जुड़े किसी भी निर्णय को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने से पहले उसकी पृष्ठभूमि, पुराने समझौते और प्रबंधन के रुख को स्पष्ट करना जरूरी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यूनियन नेतृत्व इस मामले में उठ रहे सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।

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