1960-64 बैच के पूर्व छात्र डॉ. कृष्णा पी. सिन्हा ने साझा किए दशकों के अनुभव, निर्माण संबंधी चुनौतियों और बचाव के उपायों पर दी जानकारी
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
बीआईटी सिंदरी के असैनिक अभियंत्रण विभाग में मंगलवार, 27 अक्टूबर को भू-तकनीकी विफलताओं और उनकी रोकथाम पर विशेष तकनीकी संवाद सत्र आयोजित किया गया। असैनिक अभियंता संघ के तत्वावधान में विभाग के कक्ष संख्या सी-51 में आयोजित इस कार्यक्रम में संस्थान के 1960-64 बैच के पूर्व छात्र और के.पी.एस. एंड एसोसिएट्स एलएलसी के प्रमुख डॉ. कृष्णा पी. सिन्हा ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने अनुभव साझा किए।

भू-तकनीकी विफलताओं के कारणों और रोकथाम पर चर्चा
डॉ. सिन्हा ने ‘भू-तकनीकी विफलताएं एवं उनकी रोकथाम पर एक आलोचनात्मक दृष्टिकोण’ विषय पर व्याख्यान देते हुए निर्माण कार्यों में सामने आने वाली भू-तकनीकी चुनौतियों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने लंबे पेशेवर अनुभव के आधार पर ऐसी विफलताओं के संभावित कारणों और उन्हें रोकने के व्यावहारिक एवं तकनीकी उपायों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों में भू-तकनीकी पहलुओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना और संभावित जोखिमों का समय रहते आकलन करना महत्वपूर्ण है। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ वास्तविक निर्माण परियोजनाओं में आने वाली चुनौतियों को समझने का अवसर मिला।
निदेशक डॉ. पंकज राय ने किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. पंकज राय ने डॉ. कृष्णा पी. सिन्हा को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों ने करतल ध्वनि के साथ उनका स्वागत किया।
इस अवसर पर प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के बीच सार्थक परिचर्चा भी हुई। इसमें विभाग के शैक्षणिक विकास और ढांचागत सुविधाओं से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। डॉ. सिन्हा के अनुभवों और तकनीकी मार्गदर्शन को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया गया।
प्राध्यापक और विद्यार्थी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. पंकज राय, असैनिक अभियंत्रण विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रफुल्ल कुमार शर्मा, डॉ. ब्रह्मदेव यादव, डॉ. जीतू कुजूर, डॉ. निशिकांत किस्कू, डॉ. माया राज नारायण राय, डॉ. कोमल कुमारी, प्रो. सरोज मीना, डॉ. अभिजीत आनंद और प्रो. प्रशांत रंजन मालवीय सहित अन्य प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
सत्र के समापन पर विद्यार्थियों ने व्याख्यान को विषय की व्यावहारिक समझ विकसित करने और भविष्य में पेशेवर जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए उपयोगी अनुभव बताया। कार्यक्रम ने अनुभवी अभियंताओं के ज्ञान और विद्यार्थियों की तकनीकी शिक्षा के बीच संवाद को मजबूत करने का अवसर प्रदान किया।


































