फतेह लाइव रिपोर्टर।
झारखंड के पलामू जिले स्थित मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (MMCH) में आउटसोर्सिंग के जरिए सफाई कार्य के भुगतान में एक बड़े वित्तीय घोटाले की आशंका गहरा गई है। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मिले दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि जून 2021 से सितंबर 2026 तक की 64 महीनों की अवधि में नियमों को ताक पर रखकर लगभग ₹1.27 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया है। इस खुलासे के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह से सवालों के घेरे में आ गई है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग और आरटीआई कार्यकर्ता के आरोप
इस पूरे मामले का खुलासा करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार मिश्रा ने इस पूरी अवधि के दौरान हुए कार्यों और बिलिंग की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित करने की मांग की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि इस गंभीर वित्तीय अनियमितता के मामले को राज्य के अतिरिक्त स्वास्थ्य सचिव के पास भेजा जाएगा। मिश्रा ने आशंका जताई है कि बिना किसी सक्षम अनुमोदन या आधिकारिक संशोधन के करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया जाना किसी बड़े सोची-समझी साजिश या गोलमाल का संकेत देता है।
इस प्रकार सामने आया अतिरिक्त भुगतान का गणित
दस्तावेजों में उपलब्ध गणनाओं के अनुसार, विभिन्न महीनों में स्वीकृत राशि और वास्तविक भुगतान के बीच का अंतर इस प्रकार है। हालांकि, यह आकलन अभी सांकेतिक है और असली सच्चाई वाउचर तथा बिलों के आधिकारिक सत्यापन के बाद ही पूरी तरह सामने आ सकेगी:
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31 दिन वाले 37 महीने: ₹83,05,590.54 (औसतन ₹2,24,475.42 प्रति माह अतिरिक्त)
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30 दिन वाले 22 महीने: ₹39,50,778.70 (औसतन ₹1,79,580.85 प्रति माह अतिरिक्त)
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फरवरी (28 दिन वाले) 05 महीने: ₹4,48,950.70 (औसतन ₹89,790.14 प्रति माह अतिरिक्त)
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कुल संभावित अतिरिक्त भुगतान: ₹1,27,04,919.94 (लगभग ₹1.27 करोड़)
भुगतान में अनियमितता के प्रमुख कारण
आरंभिक जांच और दस्तावेजों के विश्लेषण से भुगतान में निम्नलिखित गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं:
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मासिक पैकेज को दैनिक दर में बदलना: निश्चित मासिक पैकेज को मानक दिनों के बजाय गलत और अव्यवहारिक रूप से प्रतिदिन के हिसाब से जोड़ दिया गया।
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31 दिन वाले महीनों का अतिरिक्त लाभ: 31 दिनों वाले महीनों में अतिरिक्त दिनों का फर्जी क्लेम जोड़कर बिल की अवैध निकासी की गई।
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जीएसटी पर दोहरा प्रभाव: गलत तरीके से बढ़ाई गई दैनिक दर के कारण बेस अमाउंट के साथ-साथ 18% जीएसटी का भुगतान भी स्वतः बढ़ता चला गया।
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टेंडर नियमों का अभाव: अस्पताल के हाउसकीपिंग टेंडर में दरें प्रति वर्गफुट प्रति माह और प्रति शिफ्ट के आधार पर मांगी गई थीं, जिसमें महीने को 26 दिन मानने या अलग भुगतान का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था।
कई अधीक्षकों और लिपिकों की भूमिका संदेह के घेरे में
आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार मिश्रा ने जून 2021 से सितंबर 2026 तक अस्पताल के अधीक्षक पद पर रहे डॉ. डीके सिंह, डॉ. धर्मेंद्र कुमार और डॉ. अजय कुमार के कार्यकालों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इसके अलावा, इस पूरे खेल में लिपिकीय कार्यों से जुड़े धर्मेंद्र कुमार, राणा शहबाज खान और शाहिद अली की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि शासन स्तर पर इस मामले की उच्चस्तरीय और गहन जांच कराई जाए, तो इस वित्तीय अनियमितता के पीछे छिपे तमाम चेहरों और वास्तविक सच का पर्दाफाश हो सकेगा।


































