गुरुवार को टाटानगर स्टेशन पहुंचने पर व्यवस्था पर उठाई गई उंगली
नोवामुंडी से मायके जाने के लिए निकली थीं मां-बेटी, जमशेदपुर में बिछड़ने के बाद अलग-अलग दिशाओं में पहुंचीं
पीड़ित परिवार के पड़ोसी समाजसेवी अभिमन्यु पान की पहल पर पंजाब पहुंचे परिजन, झारखंड पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी क्षेत्र से जून 2026 में लापता हुईं 45 वर्षीय सुनीता बरजो पंजाब के अमृतसर जिले के अटारी के निकट हवेलियां गांव में मिली हैं। यह गांव पाकिस्तान की सीमा से सटा है। हालांकि, उनके साथ लापता हुईं 13 वर्षीय बेटी पार्वती बरजो का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। मां के मिलने से परिवार को राहत जरूर मिली है, लेकिन नाबालिग बेटी की तलाश अब भी अधूरी है। इस मामले ने एक बार फिर लापता लोगों की खोज में पुलिस-प्रशासन की भूमिका और सोशल मीडिया की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए हैं।
मायके जाने के लिए निकली थीं सुनीता, जमशेदपुर में बिछड़ गईं मां-बेटी
जानकारी के अनुसार, सुनीता बरजो पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी क्षेत्र के तोड़ेतोपा गांव की रहने वाली हैं। वह 19 जून 2026 को अपनी 13 वर्षीय बेटी पार्वती बरजो के साथ मायके जाने के लिए घर से निकली थीं। उन्हें झींकपानी के कुमारटोली अपने मायके जाना था, जहां एसआईआर कार्यक्रम से संबंधित कुछ कागजात लेने थे। उनके पति चुमरू बरजो ने मां-बेटी को भवानी शंकर बस में बैठाया था।
बताया जाता है कि गांव से मायके की दूरी लगभग 30 से 40 किलोमीटर है। उस दिन बारिश हो रही थी। इसी दौरान मां-बेटी अपने निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय जमशेदपुर पहुंच गईं। यहां दोनों के रास्ते अलग हो गए और वे एक-दूसरे से बिछड़ गईं।

बताई गई जानकारी के मुताबिक, 13 वर्षीय पार्वती जमशेदपुर से एक ट्रेन में सवार हो गई। बेटी को ट्रेन में जाते देख सुनीता उसके पीछे दौड़ीं, लेकिन ट्रेन पकड़ने में सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद वह दूसरी ट्रेन से बेटी की तलाश में निकल पड़ीं। इस तरह दोनों अलग-अलग दिशाओं में चली गईं और उनका परिवार लंबे समय तक उनकी तलाश करता रहा।
दृष्टिबाधित पति और मजदूर बेटों के सामने गहरा संकट
सुनीता के पति चुमरू बरजो आंखों से देख नहीं पाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई जा रही है। उनके दो बेटे सुभाष बरजो और अर्जुन बरजो मजदूरी करते हैं।

मां-बेटी के लापता होने के बाद परिवार के साथ गांव के लोग भी उनकी तलाश में जुटे रहे। परिवार के लिए यह समय बेहद मुश्किल रहा। एक ओर दृष्टिबाधित पति अपनी पत्नी और बेटी की वापसी की उम्मीद लगाए बैठे थे, तो दूसरी ओर मजदूरी करने वाले दोनों बेटों के सामने अपने परिजनों को खोजने की चुनौती थी।
सोशल मीडिया पर वायरल संदेश से मिला सुनीता का सुराग
इस पूरे मामले में गांव के पड़ोसी और समाजसेवी अभिमन्यु पान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह लगातार सुनीता और उनकी बेटी की तलाश में जुटे रहे। इसी दौरान सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर प्रसारित एक संदेश के माध्यम से सुनीता के पंजाब में होने की जानकारी सामने आई।
बताया जाता है कि यह संदेश दुर्गापूजा से लगभग दो दिन पहले झारखंड पहुंचा। इसके बाद अभिमन्यु पान ने महिला का पता लगाने और उन्हें वापस लाने के लिए प्रयास तेज कर दिए।
मिली जानकारी के अनुसार, अभिमन्यु पान ने बीते रविवार को सुनीता के बेटे अर्जुन बरजो और उनके पड़ोसी सीनू बरजो के पंजाब जाने की व्यवस्था कराई। दोनों जमशेदपुर से रवाना होकर अमृतसर पहुंचे। वहां से वे चबाल कलां (पंजाब का गांव) होते हुए हवेलियां गांव पहुंचे, जैसा वीडियो वायरल संदेश पंजाब से प्राप्त हुआ था।
सोशल मीडिया पर प्राप्त वीडियो और उपलब्ध जानकारी के आधार पर दोनों ने महिला की तलाश की। आखिरकार हवेलियां गांव में जगजीत सिंह संधू के पास सुनीता बरजो के होने की जानकारी मिली। बताया गया कि सुनीता काफी समय से उनके पास रह रही थीं और वहां उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा था। परिजनों के पंजाब पहुंचने के बाद सुनीता के मिलने की खबर से परिवार को बड़ी राहत मिली। गुरुवार को उनका एक बेटा और मित्र सुनीता को लेकर जालियांबाग ट्रेन से टाटानगर स्टेशन उतरे। जहां उनके पड़ोसी अभिमन्यु और जमशेदपुर के झारखंड आंदोलनकारी सुनील कुमार तांती उर्फ नंदा ने उनकी अगुवाई की। उन्हें सड़क मार्ग से चाईबासा तक भी ले गए। हालांकि, उनकी बेटी पार्वती की तलाश अभी भी जारी है, जो उनकी मां सुनीता, भाई और गांव के आंखों में दिख रही है।
जून से लापता होने के बावजूद कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
इस मामले को लेकर समाजसेवी अभिमन्यु पान ने झारखंड के पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सुनीता और उनकी बेटी के लापता होने के बाद नोवामुंडी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामला पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त तक भी पहुंचाया गया था। इसके अलावा झारखंड सरकार और श्रम विभाग के स्तर पर भी गुहार लगाए जाने की बात कही गई है।
बताया गया कि चाईबासा में श्रम विभाग से जुड़ी अधिकारी नलिनी गोप तक भी रांची से मामला पहुंचाया गया। इसके बावजूद परिवार को अपेक्षित सहायता नहीं मिलने का आरोप लगाया जा रहा है। जब जिम्मेदारों को पंजाब से लाने में मदद मांगी गई तो भी कुछ सहायता प्राप्त नहीं हुई।
हालांकि, पुलिस और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में क्या कार्रवाई की गई, इसकी स्वतंत्र पुष्टि और उनका पक्ष लिया जाना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है।
पार्वती की तलाश अब सबसे बड़ी चुनौती
सुनीता बरजो के मिल जाने से परिवार को राहत मिली है, लेकिन 13 वर्षीय पार्वती बरजो का अब तक पता नहीं चलना गंभीर चिंता का विषय है। जून से लापता इस बच्ची की तलाश के लिए अब समन्वित प्रयासों की जरूरत है।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है। पिता दृष्टिबाधित हैं और दोनों भाई मजदूरी करते हैं। ऐसे में बच्ची की तलाश के लिए परिवार को पुलिस-प्रशासन की सक्रिय सहायता मिलना बेहद जरूरी है।
फतेह लाइव के माध्यम से अपील है कि झारखंड सरकार, पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इस मामले को गंभीरता से लें। पार्वती बरजो की तलाश के लिए उपलब्ध सुरागों की जांच की जाए, संबंधित राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय स्थापित किया जाए और परिवार को अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी दी जाए।
यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि एक लापता नाबालिग की सुरक्षा और उसे उसके परिवार तक वापस पहुंचाने की जिम्मेदारी से जुड़ा है। सुनीता बरजो के मिलने की कहानी में सोशल मीडिया और एक समाजसेवी के प्रयासों की अहम भूमिका सामने आई है, लेकिन इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय तब पूरा होगा, जब पार्वती बरजो भी सुरक्षित मिल जाएंगी।
आपके पास पार्वती बरजो के संबंध में कोई विश्वसनीय जानकारी हो, तो कृपया नजदीकी पुलिस थाने को सूचित करें। बच्ची की पहचान और जानकारी साझा करते समय उसकी सुरक्षा तथा निजता का ध्यान रखें।
मां मिल गई, 13 साल की पार्वती का इंतजार अब भी इंतजार
जून से लापता बच्ची की तलाश में परिवार की गुहार; फतेह लाइव ने झारखंड सरकार और पुलिस प्रशासन से मांगी जवाबदेही
13 वर्षीय पार्वती बरजो जून 2026 से लापता है। उसकी मां सुनीता बरजो के पंजाब में मिलने के बाद परिवार को राहत मिली है, लेकिन बेटी का अब तक पता नहीं चलने से परिजनों की चिंता बरकरार है।
परिवार के अनुसार, 19 जून 2026 को सुनीता अपनी बेटी के साथ घर से निकली थीं। बाद में मां-बेटी जमशेदपुर में एक-दूसरे से बिछड़ गईं। सुनीता की तलाश में परिवार और ग्रामीणों ने काफी प्रयास किए। समाजसेवी अभिमन्यु पान की पहल पर सुनीता के पंजाब में होने का सुराग मिला और परिजन उन्हें वापस लाने पहुंचे। अभिमन्यु पान ने टाटानगर स्टेशन में फतेह लाइव को बताया कि भवानी शंकर बस में पति ने दोनों मां और बेटी को बैठाया था। उस दिन बारिश या कोई वजह हुई होगी जो बस सीधे जमशेदपुर में रोकी गई, जबकि झींकपानी में उन्हें उतारना था।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे अहम सवाल अब भी कायम है—पार्वती कहां है?
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है। बच्ची के पिता दृष्टिबाधित हैं और परिवार के दोनों बेटे मजदूरी करते हैं। ऐसे में परिवार को पुलिस और प्रशासन की सक्रिय सहायता की जरूरत है।
फतेह लाइव झारखंड सरकार, पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से अपील करता है कि बच्ची की गुमशुदगी के मामले की समीक्षा की जाए, उपलब्ध सुरागों की जांच की जाए और उसकी तलाश के लिए संबंधित राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया जाए।
एक बच्ची की तलाश केवल उसके परिवार की जिम्मेदारी नहीं है। उसे सुरक्षित ढूंढना और परिवार तक पहुंचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी भी है।
यदि किसी व्यक्ति के पास पार्वती बरजो के संबंध में विश्वसनीय जानकारी है, तो वह निकटतम पुलिस थाने को सूचित करे। बच्ची की तस्वीर और पहचान संबंधी जानकारी साझा करते समय उसकी निजता और सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। फतेह लाइव के नंबर (9905460502) पर भी जानकारी भेज सकते हैं। उनकी बात सरकार तक जरूर पहुँचा दी जाएगी।


































