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Saraikela : ईचागढ़ के चोगाटांड़ गांव में हाथी की मौ*त, उमड़ी भीड़

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फतेह लाइव, रिपोर्टर.

सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के कुटाम टोला चोगाटांड़ गांव में एक मादा हाथी की संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गई. रविवार की सुबह एक मृत हथिनी की मौत की सूचना मिलते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था. लोग अगरबत्ती जलाकर व पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना करते भी देखे गए. ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी. वन कर्मियों की हड़ताल के चलते समाचार लिखे जाने तक कोई वन विभाग के आला अधिकारी घटनास्थल पर नही पहुंचे हैं.

 

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15-20 साल की थी हथिनी
क्षेत्रीय वनरक्षी कैलाश महतो अपने स्वविवेक से जरूर पहुंचे व मृत हथिनी का मुआयना कर आला अधिकारियों को जानकारी दी. उन्होंने कहा कि हथिनी की उम्र 15 से 20 वर्ष हो सकती है. हालांकि मौत के कारणों को बता पाने में असमर्थता चजाई. पोस्टमार्टम के बाद ही इस संबंध में कुछ भी कहा जा सकता है.

डेढ़ साल पहले भी हुई थी हाथी की मौत
करीब डेढ़ साल पहले भी कुटाम जंगल में एक हाथी की मौत हो गई थी. करीब 4 वर्ष पूर्व पिलीद जंगल में भी एक हाथी की मौत हो गई थी. 9 जून को कुकड़ू के लेटेमदा में रेल हादसे में एक हाथी की मौत हुई थी. जुगीलोंग में एक नवजात हाथी, सापारूम में एक हाथी व सीरूम जंगल में एक हाथी की मौत हो चुकी है. नीमडीह के अंडा गांव में कुआं में गिरने से एक हाथी की मौत हो गई थी. वर्ष 2000 से अबतक करीब डेढ़ सौ से भी अधिक विभिन्न घटनाओं से हाथियों की मौत हो चुकी है. हाथियों का मौत की सिलसिला रूकने का नाम ही नहीं ले रहा है.

केंद्र व राज्य सरकार नहीं कर रही पहल
राज्य और केंद्र सरकार भी इस दिशा में आज तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की है. हाथियों का विभिन्न कारणों से हो रही मृत्यु दर को कम करने का प्रयास तक नहीं किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि शनिवार की देर रात रात 10-12 हाथियों का झुंड चोगाटाड़ गांव में विचरण करते देखा गया था. सुबह एक हथिनी की संदिग्ध मौत.

कारणों की जानकारी नहीं
हांलांकि चिकित्सकों का टीम व वन विभाग के आला अधिकारी के आने व पोस्टमार्टम के बाद ही मामला का खुलासा होने का संभावना है. आखिर हथिनी का मौत किन कारणों से हुई है? लोगों में भी इस संबंध में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही है.

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