New Delhi : सुप्रीम कोर्ट की रोक पर बाल अधिकार संगठन ने किया पीड़िता के लिए समर्थन

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  • इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने की पैरवी

फतेह लाइव, रिपोर्टर

इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, जिसे गैरसरकारी संगठन आदर्श सेवा संस्थान ने बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम करार दिया है. यह मामला एक 11 वर्षीय बच्ची से बलात्कार के प्रयास से संबंधित है, जिसमें हाई कोर्ट ने चौंकाने वाली टिप्पणियां की थीं. सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे असंवेदनशील और कानून के विपरीत करार दिया है. जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी), जो देश के 416 जिलों में 250 से अधिक संगठनों का नेटवर्क है, पीड़िता के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई की अगुआई करेगा.

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सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई पर आदर्श सेवा संस्थान की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की विशेष अनुमति याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिससे संगठन को पीड़िता की पैरवी करने की अनुमति मिली है. आदर्श सेवा संस्थान की निदेशक प्रभा जायसवाल ने कहा, “अगर देश में एक भी बच्चा अन्याय का शिकार है तो जेआरसी उसके साथ है. न्यायपालिका बच्चों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील है, जो सुप्रीम कोर्ट के मामले का स्वत: संज्ञान लेने से स्पष्ट है. जेआरसी अब इस बच्ची को न्याय दिलाने के प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ेगा.” उन्होंने यह भी कहा कि संगठन बाल विवाह, बाल यौन शोषण और बाल मजदूरी के खिलाफ प्रतिबद्ध है.

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जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के नेतृत्व में कानूनी लड़ाई

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर तीखी टिप्पणियां कीं, इसे “चौंकाने वाला और कानून की किसी भी समझ से रहित” करार दिया. खंडपीठ ने कहा कि फैसले में की गई कुछ टिप्पणियां, विशेष रूप से पैरा 21, 24 और 26 की सामग्रियां घोर असंवेदनशील हैं. न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह की खंडपीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को मानवता और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया.

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पीड़िता के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर दी प्रतिक्रिया

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की अधिवक्ता रचना त्यागी ने कहा, “इस मामले में साढ़े तीन साल से अधिक समय तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई और कानूनी कार्यवाही बिना किसी औपचारिक जांच के चलती रही. यह लापरवाही गंभीर अन्याय है.” उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका को स्वीकार किया है, जो पीड़िता के लिए राहत की बात है. संगठन पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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