पत्रकार का नाम जानने को उत्सुक मीडिया जगत, थाना से गणेश सिंह को खुली चुनौती
निखार सबलोक हत्याकांड के बाद गैंगवार की आशंका के बीच थाना परिसर में कन्हैया के तेवर और बिना नाम लिए पत्रकार पर की गई टिप्पणी चर्चा में
News 26 से जुड़े लोगों और कथित साजिश के पहलुओं पर भी सवाल!
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर में निखार सबलोक हत्याकांड के बाद दो गुटों के बीच पुरानी अदावत के साथ अब एक और सवाल चर्चा में है—आखिर वह पत्रकार कौन है, जिसे बिना नाम लिए ‘दोगला’ कहा गया? कन्हैया सिंह की गिरफ्तारी और उसे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के दौरान सामने आए घटनाक्रम के बीच इस कथित टिप्पणी को लेकर पत्रकार जगत में भी उत्सुकता बताई जा रही है। टिप्पणी किस पत्रकार के लिए की गई थी और उसके पीछे क्या संदर्भ था, यह स्पष्ट होना बाकी है।
इसी घटनाक्रम में कन्हैया सिंह ने अपनी गिरफ्तारी के पीछे गणेश सिंह का हाथ होने का आरोप लगाते हुए चुनौतीपूर्ण अंदाज में कहा कि वह सबकुछ देख लेगा। पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में दिए गए इस बयान और पत्रकार को लेकर की गई कथित टिप्पणी ने मामले को नया चर्चा-बिंदु दे दिया है। हालांकि, कन्हैया के आरोपों और टिप्पणी के संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। खैर, यह भी जानना जरुरी है कि निखार सबलोक की हत्या के बाद भी कई पत्रकारों का नाम भी उछला है, जो अभी खुद को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं। बड़े बड़े मीडिया हॉउस से जुड़े वह लोग शामिल हैं। जिनकी डायरी पहले जमशेदपुर पुलिस के पास, तो अब सरायकेला पुलिस के पास भी पहुंच गई है, और वह समय आने पर खोलेगी?
निखार हत्याकांड से जुड़ी जांच ने पहले ही बढ़ाई थी हलचल
कदमा के विजया हेरिटेज निवासी होटल कारोबारी निखार सबलोक की 24 अगस्त को चांडिल में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस जांच में आपसी रंजिश और जमीन कारोबार से जुड़े विवाद की आशंका सामने आई। इस मामले में कई आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और घटनाक्रम लगातार चर्चा में रहे हैं।
इस प्रकरण में सोशल मीडिया न्यूज प्लेटफॉर्म News 26 से जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे। हजारों का वेतन पाने वाले कुछ लोग फिलहाल कानून की नजर के इर्द गिर्द हैं, लेकिन उससे जुड़े लोग कुछ तथाकथित लोग नए सोशल मीडिया नए नाम से हैंडल करके फिर थाना पुलिस की चापलूसी में मग्न हो गए हैं। यह संकेत निष्पक्ष पत्रकारिता करने वालों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं, जिसपर ध्यान देना जमशेदपुर के दो बड़े-बड़े क्लब और आधा दर्जन से ज्यादा पत्रकार संगठनों के लिए जरुरी है.
जमीन कारोबार की पुरानी अदावत से जुड़ा है तनाव
अखिलेश सिंह और गणेश सिंह से जुड़े गुटों के बीच जमीन कारोबार में वर्चस्व को लेकर लंबे समय से तनातनी की बात सामने आती रही है। पहले भी दोनों पक्षों से जुड़े लोगों के बीच फायरिंग की घटनाएं हो चुकी हैं। बागबेड़ा निवासी मोनू सिंह से जुड़े विवाद और उसे कथित तौर पर निशाना बनाने की योजना की जानकारी भी निखार हत्याकांड की जांच के दौरान सामने आने की बात कही गई थी। पिछले दिनों सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मामला सामने आने पर अगर जिला की मुस्तैद पुलिस यह समझ लेती तो आज थाना से एक गैंगस्टर का सहयोगी इतनी बड़ी बात बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता, जो आने वाले समय में फिर सरकार की सरदर्द बनने वाली घटना साबित हो सकती है और पुलिस के मुंह पर तमाचा भी। जैसा कि पिछले दिनों सरकार को कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर होना पड़ा और दो दो जिलों के मियां बीबी पुलिस सुप्रीम को हटाना पड़ा था।
ऐसे में कन्हैया सिंह का बयान केवल गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया भर नहीं रह जाता, बल्कि पुरानी प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, किसी नए टकराव की आशंका को फिलहाल जोड़कर देखा जाये तो आने वाले दिनों में बहुत बड़ी वारदात को इशारा कर रही है। पूजा त्योहारों के समय भगवान ही जमशेदपुर पुलिस की मदद करे? फिर बड़ी बड़ी अख़बारों में नाम उछलेगा डॉ अजय कुमार का, जो गोलियां चलाते थे और शहर में अमन शांति कायम किये थे।
पत्रकार की पहचान पर सवाल, पुष्टि का इंतजार
इस पूरे घटनाक्रम में अब पत्रकार को बिना नाम लिए ‘दोगला’ कहे जाने की कथित टिप्पणी भी चर्चा का विषय बन गई है। पत्रकार जगत में यह जानने की उत्सुकता हो सकती है कि टिप्पणी किसके लिए की गई थी और किस संदर्भ में की गई। लेकिन जब तक कन्हैया सिंह का खुलकर पत्रकार का नाम लेना या कोई विश्वसनीय स्रोत उपलब्ध न हो, तब तक किसी पत्रकार का नाम जोड़ना उचित नहीं होगा?
बहरहाल, निखार हत्याकांड की जांच, गैंगवार की आशंका और पत्रकार को लेकर कथित टिप्पणी—तीनों पहलुओं पर आधिकारिक तथ्यों का सामने आना जरूरी है। फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि क्या इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी तस्वीर जांच में स्पष्ट हो पाएगी और क्या पुलिस दोनों गुटों के बीच तनाव को किसी नए टकराव में बदलने से रोक सकेगी या फिर डॉ अजय कुमार वाली कार्यशैली अपनाएगी? या फिर पुलिस शहर में बदनाम होती रहेगी, जैसा की आम पब्लिक देख रही है।


































