Jamshedpur : प्रकृति पर्व सरहुल पर आदिवासी पारंपरिक छंटा से सराबोर हुई लौहनगरी

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फतेह लाइव, रिपोर्टर.

लौहनगरी जमशेदपुर में गुरुवार को धूमधाम से प्रकृति पर्व सरहुल मनाया गया. जहां सरना स्थलों से निकली शोभायात्रा में शामिल लोगों के स्वागत के लिए शिविर लगाया गया. भालूबासा मेन रोड स्थित काली माता मंदिर के समक्ष शहर की सामाजिक संस्था लोक समर्पण की ओर से विशाल सेवा शिविर लगाया गया. सेवा शिविर में श्रद्धालुओं को शीतल पेय, शर्बत, फल सामग्री एवं चॉकलेट भेंट की गई. इस दौरान संस्था के अध्यक्ष ललित दास ने शोभायात्रा में शामिल उरांव समाज, मुंडा समाज, हो समाज, तुरी समाज, भुइँया समाज व अन्य समाज के सभी प्रमुख लोगों का फूल माला पहनाकर एवं अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया एवं सरहुल की शुभकामनाएं दी.

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प्रकृति के बिना मानव जीवन की परिकल्पना असंभव

इस अवसर पर अध्यक्ष ललित दास ने कहा कि प्रकृति संरक्षण पर आधारित महान पर्व सरहुल आज देशभर में पूरे हर्षोल्लास से मनाई जा रही है. सरहुल प्रकृति की उपासना का महापर्व है. प्रकृति के बिना मानव जीवन की परिकल्पना नहीं की जा सकती है. प्रकृति बचेगी, तभी धरती पर मानव जीवन का अस्तित्व बचेगा. उन्होंने कहा कि सिर्फ आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि समाज के सभी लोगों को प्रकृति की रक्षा के लिए सजग रहकर इसके संरक्षण और संवर्धन हेतु कदम उठाने होंगे. सेवा शिविर के आयोजन में संस्था के सचिव नीरज कुमार, ज्ञान सिंह चौहान, धीरज कुमार, सुभाष मुखी, मिथलेश साव, रूपेश साहू दीपक सिंह, संतोष कुमार, टिंकू मुंडा, शशि मिश्रा अरविंद सिंह, सूरज सिंह देव, सोनू दत्ता, देबाशीष पोद्दार समेत अन्य का योगदान रहा.

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