लाइसेंस की वैधता और लीज डीड हस्तांतरण पर विवाद; प्रशासन की जांच के बाद बंद कराई गई दुकानों के दोबारा खुलने का आरोप
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर में टाटा-हाता मुख्य मार्ग पर पटाखा कारोबार को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला प्रशासन की जांच में दो दुकानों के लाइसेंस की समय सीमा समाप्त पाए जाने के बाद उन्हें बंद कराने और संबंधित दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, अगले ही दिन दोनों दुकानों के दोबारा खुलने का आरोप लगाया गया है। अब इस मामले में जमीन मालिक भी सामने आए हैं और दुकान संचालन की वैधता पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।
लीज और लाइसेंस को लेकर विवाद
मामले के अनुसार, जिला प्रशासन ने पिछले दिनों टाटा-हाता मुख्य मार्ग पर संचालित पटाखा दुकानों के दस्तावेजों की जांच की थी। इस दौरान मिनगोटिया इंटरप्राइजेज और मां बम्बोरी ट्रेडर्स के लाइसेंस की वैधता समाप्त पाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद संबंधित दस्तावेज जमा करने का निर्देश देते हुए दोनों दुकानों को बंद करा दिया गया था।
आरोप है कि प्रशासनिक कार्रवाई के अगले ही दिन दुकानदारों ने अपनी दुकानें फिर से खोल दीं। इस घटनाक्रम के बाद पटाखा कारोबार के संचालन और प्रशासनिक निर्देशों के अनुपालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जमीन मालिक ने दर्ज कराई लिखित शिकायत
मंगोतिया इंटरप्राइजेज से संबंधित जमीन के मालिक मैथिसन सरदार ने जुगसलाई निवासी अरुण साहू के खिलाफ लिखित शिकायत देकर उनके लाइसेंस और लीज से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, मैथिसन सरदार ने जुगसलाई निवासी स्वर्गीय अरविंद अग्रवाल को 1 सितंबर 2024 से 31 जुलाई 2029 तक अपनी जमीन लीज पर दी थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसी लीज के आधार पर पटाखा कारोबार के लिए लाइसेंस जारी कराया गया था।
मैथिसन सरदार का आरोप है कि वर्तमान में अरुण साव कथित तौर पर लीज डीड का हस्तांतरण कराए बिना और वैध लाइसेंस के अभाव में दुकान का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि कई बार मौखिक और लिखित रूप से दुकान संचालन पर आपत्ति जताने के बावजूद कारोबार जारी है। उन्होंने कहा कि लीज डीड अरविन्द अग्रवाल से हुआ था, लेकिन अरुण साहू ने उक्त डीड को अपने नाम पर भी नहीं कराया है।
प्रशासनिक अधिकारियों से लगाई गुहार
जमीन मालिक का कहना है कि उन्होंने थाना स्तर से लेकर जिले के वरीय प्रशासनिक अधिकारियों तक मामले की जानकारी पहुंचाई है। उन्होंने जमीन पर पटाखों के कथित अवैध भंडारण और कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि यदि बड़ी मात्रा में पटाखों के भंडारण के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो जान-माल का नुकसान हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से समय रहते मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।
क्या कहते हैं नियम?
पटाखों की बिक्री और भंडारण के लिए संबंधित प्राधिकरण से वैध लाइसेंस तथा निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक है। लाइसेंस की वैधता समाप्त होने, उसके निर्धारित शर्तों का उल्लंघन होने अथवा अनधिकृत भंडारण की स्थिति में संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। जमीन की लीज, लाइसेंसधारी की पहचान और कारोबार के वर्तमान संचालक के अधिकारों की भी दस्तावेजों के आधार पर जांच जरूरी है। सीएनटी जमीन से संबंधित नियमों और पटाखा लाइसेंस की पात्रता के विषय में भी जांच जरुरी है।
कार्रवाई या सिर्फ खानापूर्ति?
जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद कथित तौर पर दुकानों के दोबारा खुलने का मामला प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है। दुकानदारों की ओर से कथित तौर पर यह दलील दिए जाने की बात सामने आई है कि उन्हें प्रशासन की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला था।
ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दुकानों को बंद करने के लिए क्या लिखित आदेश जारी किया गया था, संबंधित कारोबारियों को कौन-से दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया और दोबारा दुकान खोलने की अनुमति थी या नहीं।
अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या संबंधित दुकानों के लाइसेंस, लीज डीड और पटाखों के भंडारण की जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी या मामला केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहेगा, यह प्रशासन के रुख से स्पष्ट होगा।


































