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Jamshedpur : सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करें राजनीतिक दल, पंजाब हरियाणा के तर्ज पर दें कोटे में कोटा,आरक्षण के लाभ से छूटे वंचित समूह को मिले अवसर

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फतेह लाइव, रिपोर्टर.

अधिवक्ता कुलविंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश आरक्षण में कोटे में कोटा का समर्थन किया है। अधिवक्ता एवं पत्रकार कुलविंदर सिंह के अनुसार पंजाब एवं हरियाणा की तर्ज पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कोटे में कोटा का लाभ वंचित समूह को दिया जाना चाहिए। राज्य का उद्देश्य कल्याणकारी है और आरक्षण के प्रावधान को संविधान में रखा गया है। कुलविंदर सिंह के अनुसार पंजाब में अनुसूचित जाति में दो वर्गीकरण है, आबादी तथा आरक्षण के लाभ के अवसर के आधार पर समूह ए और समूह बी में वर्गीकरण किया है। हरियाणा भी उसी तर्ज पर आगे बढ़ा है।

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बिहार झारखंड को देखे थे पिछड़ी जाति में ही दो वर्गीकरण समूह, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग समूह है। राज्य का उद्देश्य सभी को समान अवसर देना है और ऐसे में जातियों का वर्गीकरण गलत नहीं है। असल में आरक्षण का लाभ ले रही कुछ जाति समूह राजनीतिक आर्थिक सामाजिक शैक्षणिक रूप से इतने प्रभावशाली हो गए हैं कि कुछ समूह काफी पीछे छूट गए हैं और उन्हें आगे ले जाना चाहिए, आखिरकार आरक्षण का उद्देश्य भी यही है।

अधिवक्ता कुलविंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट की भावनाओं का सम्मान करते हुए इसे लागू करने का काम करें। यह कहीं से भी संविधान के अनुच्छेद 340, 341 एवं 342 के प्रावधान का उल्लंघन नहीं है और सभी राज्यों को पंजाब हरियाणा के तर्ज पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों का वर्गीकरण करने का निर्देश जारी करना चाहिए। जब पिछड़ी जाति आरक्षण में देश ने सुप्रीम कोर्ट के क्रीमी लेयर के प्रावधान को आसानी से स्वीकार कर लिया तो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति में आरक्षण का लाभ ले रहे समूह भी देर सबेर इसे स्वीकार कर ही लेंगे।

उनको आपत्ति इसलिए नहीं होगी क्योंकि क्रीमी लेयर की व्यवस्था होगी और जो उस वर्ग विशेष में वंचित रह गए हैं उन्हें निश्चय ही आरक्षण का लाभ मिलेगा। उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा नेतृत्व से भी आग्रह किया है कि राजनीतिक नफा नुकसान देखे बिना वंचित समूह के लिए आगे बढ़कर काम करना चाहिए।

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