Jamshedpur Sikh Samaj : “संगत सर्वोपरि” व्हाट्सअप ग्रुप में बिछ रही सीजीपीसी के खिलाफ बिसात

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अब डीएसपी से सिख समाज के विवादित मसले गुरुद्वारा और सेंट्रल में भेजे जाने का नया मुद्दा गरमाया

अवतार सिंह भाटिया समेत विभिन्न सिख प्रतिनिधियों की आ रही कड़ी प्रतिक्रिया

कुलविंदर सिंह ने भी मौके पे मारा चौका, की कड़ी टिप्पणी

ग्रुप के मार्फत विपक्ष किसी भी मुद्दे को तूल देने में नहीं है पीछे, संगत का भी मिल रहा समर्थन

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

अगर आप सोच रहे हैं कि जमशेदपुर में सिख राजनीति में सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है. विपक्ष शांत हो गया है. सीजीपीसी के पूर्व प्रधान गुरमुख सिंह मुखे भी चुप क्यों बैठे हैं, तो यह सोचना बिल्कुल ही गलत होगा. जी हां, सिख राजनीति में विपक्ष अपनी चालें चलने में कहीं से भी कमजोर नहीं है. पिछले समय सीजीपीसी से सीतारामडेरा के चुनाव को लेकर संगत का एक गुट ऐसा नाराज हुआ था कि उन्होंने “संगत सर्वोपरि” व्हाट्सअप ग्रुप तैयार करके बगावत छेड़ दी.

आज वह ग्रुप इतना मजबूत हो रहा है कि सीजीपीसी के खिलाफ बिसात बिछाने की ओर अग्रसर है. सीजीपीसी के ओहदेदार जो भी बयानबाजी या फिर कुछ घोषणायें करते हैं. उन सब पर इस ग्रुप के लोगों की नजर रहती है और जहां कहीं भी इन्हें लगता है कि यह गलत निर्णय है वहां खुलकर उसका विरोध शुरु हो जाता है. हां यह भी जरूर कहने वाली बात होगी कि अच्छे काम का गुणगान भी इस ग्रुप में किया जाता है.

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इधर, अभी संगत सर्वोपरि व्हाट्सअप ग्रुप में सीजीपीसी के खिलाफ वह मुद्दा गरमाया हुआ है, जिसमें पिछले दिनों सिटी डीएसपी सुनील चौधरी को मिलकर सीजीपीसी के नेताओं ने कहा था कि वह जिला प्रशासन से यह मांग करते हैं कि समाज के विवादित मसले वह सम्बंधित गुरुद्वारा या सीजीपीसी तक पहुंचाएँ, जिसका समाज अपने स्तर से निपटारा करेगा. इस मांग को लेकर संगत सर्वोपरि ग्रुप में बहस चल रही है. ग्रुप के सदस्य प्रीतपाल सिंह, सरदार गुरमुख सिंह मुखे, चरणजीत सिंह चन्नी और अन्य कई जागरूक लोग सोशल मीडिया के जरिए अपने विचार रख रहे हैं. इनमें से अवतार सिंह भाटिया ने एक बयान देकर कहा है कि वह भी सिख समाज के सम्मानित लोगों में एक हैं.

सिख समाज आंदोलन समिति और झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमिटी का यह मानना है कि प्रशासन ऐसी भूल कभी ना करें, क्योंकि लाठी के जोर पर वहां फैसले होते हैं. भाटिया ने साफ शब्दों में कहा कि पहले के समय एक सिख नेता ने जो भी समाज के फैसले कराये हैं वह जग जाहिर है. समाज न्यायालय से अपने विवाद का निपटारा कराएं, वरना वहां समाज और पंथ के नाम पर जबरन निर्णय थोपे जायेंगे.

बहरहाल, सिर्फ यही नहीं इस ग्रुप में सितारामडेरा और बारीडीह गुरुद्वारा के विवादों पर आये दिन टिका टिप्पणी जारी है. सोशल मीडिया से खुलकर बिना नाम लिए आरोप प्रत्यारोप जारी है. एक किराये के प्रतिष्ठान को लेकर भी आग लगी हुई है. ऐसे में यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि सीजीपीसी की नीतियों के खिलाफत विपक्ष मजबूती से मुस्तैद है और इसका फलाफल क्या होता है, भविष्य के गर्त में है.

पंचायती नहीं पक्षपात करती है सीजीपीसी: कुलविंदर, सिख पंथ में संबंध विच्छेद की गुंजाइश नहीं

कौमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिवक्ता कुलविंदर सिंह ने कहा कि सीजीपीसी (सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी) के पदधारी किसी भी सामाजिक धार्मिक मामले में पंचायती नहीं बल्कि पक्षपात करती है। यह हमेशा ताकतवर एवं प्रभावशाली लोगों के पक्ष में खड़ी रहती है और कमजोर लोगों को दबाने का काम करती है। जिला पुलिस एवं प्रशासनिक पदाधिकारी तथा न्यायालय में कमजोर वर्ग व्यक्ति के साथ न्याय होने की उम्मीद है परंतु सीजीपीसी से ना उम्मीद और निराश होना पड़ता है।

बारीडीह एवं सीतारामडेरा गुरुद्वारा का मामला पूरे शहर में जग जाहिर है कि सेंट्रल कमेटी के दो चार पदाधिकारी की भूमिका कितनी गंदी, अविवेकपूर्ण और पक्षपात वाली रही है। इन्हें धर्म, पंथ, समाज से कुछ मतलब नहीं बल्कि इसकी आड़ में अपना व्यवसाय चमकाने की पड़ी रहती है।

सिख पंथ में विवाह के संबंध विच्छेद का कोई प्रावधान नहीं है। श्री अकाल तक साहब से भी आदेश जारी है कि गुरुद्वारा कमेटी ऐसा कोई फैसला नहीं करेगी जिसमें विवाह का संबंध विच्छेद किया जाए।

सिखों ने खुद सरकार पर दबाव बनाकर आनंद मैरिज एक्ट कानून बनवाया है जिसमें भी संबंध विच्छेद की गुंजाइश नहीं है। फिर गुरुद्वारा कमेटी क्यों संबंध विच्छेद जैसा पाप कर रही है।

ऐसा कई बार देखने को मिला है जब गुरुद्वारा कमेटी में संबंध विच्छेद कर दिया गया है और लड़का लड़की ने दूसरी शादी कर ली है परंतु कोर्ट में उन्हें अपना केस हारना पड़ा है।

कुलविंदर सिंह के अनुसार जिला एसएसपी, सिटीएसपी, डीएसपी एवं थाना प्रभारी को सीजीपीसी के शब्द जाल में फंसने की जरूरत नहीं है कानून के अनुसार उन्हें अपना काम करना चाहिए। जब भारतीय न्यायिक व्यवस्था में प्री लिटिगेशन, मिडियेशन जैसे प्रावधान है तो फिर बाहरी मनमाने ढंग से पंचायती करने वाली व्यवस्था की जरूरत क्या है?

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