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Jamshedpur : डीबीएमएस कॉलेज में “ग्रीन एनर्जी और ग्रीन टेक्नोलॉजी विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

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झारखंड, ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने लिया भाग

फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर के डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन में कोरू फाउंडेशन के सहयोग से “ग्रीन एनर्जी और ग्रीन टेक्नोलॉजी: सतत विकास का भविष्य” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ प्रातः 10:00 बजे हुआ। इसमें झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के विभिन्न महाविद्यालयों से आए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

डी.बी.एम.एस. ट्रस्ट के चेयरपर्सन डॉ. बी. चंद्रशेखर ने उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए सतत विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रभात सिंह, समन्वयक, वोकेशनल सेल, कोल्हान विश्वविद्यालय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशाला तीन दिनों की होनी चाहिए थी, ताकि विषय पर और अधिक गहराई से चर्चा हो सके।

उन्होंने कहा कि सतत विकास की दिशा में उठाए गए छोटे-छोटे कदम भी दूरगामी परिणाम दे सकते हैं। उन्होंने टाटा स्टील का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां बायोगैस से संचालित मेस संकट के समय भी सुचारु रूप से कार्य करती रही, जो हरित ऊर्जा के महत्व को दर्शाता है।

प्रख्यात शिक्षाविद् एवं सीनेट सदस्य डॉ. अमर कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकृति के पास हमारी कई समस्याओं के समाधान मौजूद हैं, आवश्यकता उन्हें खोजने की है। उन्होंने इस क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा युवाओं में जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। उनके अनुसार छोटे-छोटे समाधानों का व्यावहारिक क्रियान्वयन ही सतत विकास को मजबूत बनाता है।

स्वच्छता पुकारे के निदेशक श्री गौरव आनंद ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बायोगैस का उत्पादन घरों में, यहाँ तक कि बालकनी में भी किया जा सकता है। उन्होंने बायोगैस निर्माण की प्रक्रिया समझाई और प्लास्टिक से सड़कों के निर्माण की तकनीक पर भी प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि जल कुम्भी (वॉटर हायसिन्थ) को पुनर्चक्रित कर साड़ियाँ, फाइलें और फोल्डर जैसे उपयोगी उत्पाद बनाए जा सकते हैं।

गरिमा रोहिल्ला ने कहा कि सतत विकास के लिए हमारे व्यवहार में परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत में प्रतिदिन लगभग 1 लाख 70 हजार टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से केवल 35 प्रतिशत कचरे का ही वैज्ञानिक ढंग से निपटान हो पाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सावधानीपूर्वक उपयोग न किया जाए तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का अत्यधिक उपयोग भी पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन पैदा कर सकता है।

आचार्या निहार रंजन उड़ीसा से आए रिसोर्स पर्सन ने गीता पुराण वेद में वर्णित सस्टेनेबिलिटी और ग्रीन एनर्जी पर अनेक श्लोकों की व्याख्या करते हुए आज के परिप्रेक्ष्य में इसके महत्व पर प्रकाश डाला।

यह कार्यशाला अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी रही, जिसने प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। बी.एड के प्रथम एवं द्वितीय सत्र के छात्रों द्वारा पर्यावरण पर आधारित मॉडल का भी प्रदर्शन किया गया। जिसे बाहार से आये सभी अतिथियों ने काफी सराहा।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉक्टर विक्रांत तिवारी डायरेक्टर adivasi.org ने अपने अनुभवों के आधार पर छात्रों को पर्यावरण बचाने के अनेक तरीके बताएं। डॉक्टर विक्रांत तिवारी डायरेक्टर ने adivasi.org के द्वारा सरकारी सुविधाओं के बिना उन्होंने 15 लाख पेड़ लगा कर एक रिकार्ड बनाया है. प्रतिभागियों के साथ रोचक प्रश्नोत्तरी सत्र में सतत विकास के विषय में जानकारी दी। पढ़े लिखे लोगों को आगे आकर रिस्क लेना चाहिए। ग्रीन भविष्य की बात भी उन्होंने कही।

बी.एड के छात्रों ने ग्रीन एनर्जी और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर अनेक मॉडल भी दिखा कर पर्यावरण बिंदो का मन मोह लिया। अमृता चौधरी की टीम ने पर्यावरण गीत भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डी.बी.एम.एस. कॉलेज की आई.क्यू.ए.सी टीम ने बहुत मेहनत की थी।

कार्यक्रम सत्र में कॉलेज की सचिव श्रीप्रिया धर्मराजन , सह-सचिव सुधा दिलीप, प्रशासनिक सचिव सतीश सिंह, प्राचार्या डॉ.जूही समर्पिता, उप-प्राचार्या डॉ. मोनिका उप्पल, शिक्षिकाएं एवं सभी कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर मौसमी दत्ता एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ.मोनिका उप्पल ने किया।

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