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Tata Workers Union Hungama : सियासत में घसीटने से टाटा वर्कर्स यूनियन के कर्मचारी दुखी, गुस्सा भी

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सभी कर्मचारी गोलबंद, टुन्नू, सतीश समेत ऑफिस बेयरर्स से मिल बताई व्यथा

उच्च शिक्षा के लिए ब्याज मुक्त ऋण की सीमा बढ़ाई गई तो यूनियन में झमेला

कर्मचारियों की एका देख संजय ने सबको भेजा संदेश, ऋण के विरोधी नहीं

चरणजीत सिंह.

टाटा वर्कर्स यूनियन के कर्मचारियों की उच्च शिक्षा के लिए ब्याज मुक्त ऋण की सीमा तीन से बढ़ा कर छह लाख करने का फैसला लिया गया तो बखेड़ा खड़ा हो गया. दो दिन पहले हुई यूनियन की फाइनेंस कमेटी की बैठक में संजय सिंह पूरी तरह उखड़ गए. यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश कुमार सिंह द्वारा परंपरा के तहत लिए गए फैसले पर सवाल उठा दिया.

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सारा घटनाक्रम यूनियन के कर्मचारियों ने सुना. सब बहुत दुखी हुए और गोलबंद भी. उनमें गुस्सा भी है  शनिवार को के सभागार में सभी यूनियन कर्मचारी अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू, महामंत्री सतीश सिंह समेत कई ऑफिस बेयरर्स से मिले, व्यथा सुनाई. टुन्नू चौधरी का कहना था कि उन्हें शिक्षा ऋण देने पर कोई दिक्कत नहीं है. सिर्फ इसके लिए नियम या प्रावधान तय करने की बात है.

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उन्होंने कहा कि अब यूनियन में नई बहाली नहीं होगी. जो लोग हैं, उनका वेतन बेहतर करने की कोशिश की जाएगी. महज कुछ माह बाद सेवानिवृत होने वाले यूनियन कर्मचारी अरविंद का कहना था कि उन्हें एक्सटेंशन नहीं चाहिए. अधिकतर कर्मचारियों के बच्चे पढ़ लिख चुके हैं. फीस बढ़ चुकी हैं. यूनियन कर्मचारियों के पास आय या ऋण लेने का और कोई श्रोत नहीं है.

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ऋण सीमा बढ़ाने पर इतना झमेला हुआ तो सबको बहुत दुख है. उस वक्त संजय सिंह वहां नहीं थे. कुछ देर में उन्हें सूचना मिल गई. उन्होंने सभी यूनियन कर्मचारियों को संदेश दिया कि शिक्षा के लिए ऋण पर उन्हें दिक्कत नहीं है. वे यही चाहते थे कि नियम कायदे के तहत निर्णय लिया जाय. अब फाइनेंस कमेटी की अगली बैठक होगी तो ऑफिस बेयरर्स का रुख साफ होगा. इतना जरूर है कि अब यूनियन में जो भी नए पुराने खर्च हुए हैं या हो रहे हैं, उसमें नियम और परंपरा के सवाल जरूर उठ सकते हैं.

शनिवार को यूनियन के सभी कर्मचारियों ने टाटा वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों को एक पत्र दिया. पत्र में कहा गया कि यूनियन के कर्मचारियों को जो मासिक वेतन दिया जाता है. वह कम है. अधिकतर कर्मचारी 25 से 38 वर्ष तक यूनियन में अपनी सेवा दे चुके हैं. उन्हें जो वेतन मिलता है वो टाटा स्टील में नये आए एनएस ग्रेड के कर्मचारियों से भी कहीं कम है. यूनियन नेताओं को बताया गया कि पूर्व में यूनियन के कर्मचारियों को जो वेतन दिया जाता था, वह ओल्ड ग्रेड के कर्मचारियों के प्रारम्भिक वेतन के समकक्ष होता था.

यूनियन की मासिक आय कम होने का सबसे बुरा प्रभाव यूनियन कर्मचारियों पर ही पड़ा और उनका वेतनमान कमतर होता गया. यहां तक कि उन लोगों का डीए प्रति प्वाइंट वैल्यू पिछले 35 साल से केवल दो फीसदी है. नये एनएस कर्मचारियों को डीए प्रति प्वाइंट 3 रूपये और ओल्ड सीरिज को प्रतिशत में दिया जाता है. यूनियन कर्मचारियों ने कभी किसी प्रकार की शिकायत नहीं की. सबको पूर्ण विश्वास रहा है कि अति आवश्यक खर्च आया तो यूनियन नेतृत्व खुद रास्ता निकालेगा. किसी प्रकार की आकस्मिक आवश्यकता में यूनियन नेतृत्व ने सदैव सहयोग किया है.

पत्र में यूनियन कर्मचारियों ने बताया कि शुरुआती दिनों में वे लोग टाटा स्टील के हर विभाग में जाकर कर्मचारियों से चंदा काटते थे. कभी कभी बहुत कड़वी बातें भी सुननी पड़ती थी. मार तक खाने की नौबत आ जाती थी. इसके बावजूद हमलोग यूनियन से जुड़े रहे. यूनियन का चुनाव जब कंपनी से बाहर हुआ तब लगे रहे. जब हाथ उठाकर जीत-हार की व्यवस्था थी. तब हमलोगों को बहुत कुछ झेलना पड़ता था. चाहते तो हमलोग यूनियन छोड़कर कहीं और अपनी सेवा देने चले जाते. कई लोग चले भी गए, लेकिन हमलोग जुड़े रहें. पूर्व के यूनियन अध्यक्ष, महामंत्री एवं अन्य पदाधिकारियों ने हमेशा ही हमलोंगों का अपने स्तर से पूर्ण ध्यान रखा. उसी परंपरा के अनुसार ही वर्तमान अध्यक्ष, महामंत्री एवं अन्य पदाधिकारी भी सहयोग करते हैं.

पत्र में कहा गया कि वर्तमान में भी यूनियन चुनाव हो या कोई भी विशेष कार्यक्रम, हम सभी दिन-रात भुलकर कार्य करते हैं. संस्था को सर्वोपरि समझते हुए भरपूर मेहनत करते हैं. सभी को इस बात की भी जानकारी है कि यूनियन के कर्मचारियों का पीएफ यूनियन के ही पास रहता है. इस कारण सेवानिवृत होने के बाद सरकार की व्यवस्था के अनुसार बाकी लोगों की तरह हमें पेंशन नहीं मिलता. कंपनी की व्यवस्था के मुताबिक न ही टेप्स और न ही ईपीएस-95 जैसी कोई व्यवस्था है.

सेवानिवृत्त होने के बाद कोई वित्तीय सुरक्षा नहीं है. वैसे तुलना करना उचित नहीं है, फिर भी बताना चाहेंगे कि हमलोगों के लिए नाइट शिफ्ट अलाउंस, इंसेंटिव बोनस, अवार्ड्स, वेरियस टाइप ऑफ़ लोन, सोसाइटी लोन, सेवरल अलाउंस, मिलिनियम स्कॉलरशिप, टाइम बाउंड प्रमोशन, अपग्रेडेशन जैसी आर्थिक सहायता की व्यवस्था नहीं है. मेडिकल रेफरल की सुविधा भी नहीं है. अगर यूनियन के किसी कर्मचारी की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, तो किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता या संरक्षण की व्यवस्था नहीं है.

हां, अगर मृत्यु हो जाती है तो 5 हजार रूपये कफन-दफन के लिए अवश्य दिया जाता है. कंपनी कर्मचारियों की भांति सेवानिवृत होने उपरान्त एक वर्ष का मेडिकल एक्सटेंशन भी बंद कर दिया गया. इसके बदले में कुछ भी राशि नहीं दी जाती है.

पत्र में कहा गया कि आप लोगों के संज्ञान में यह भी लाना चाहते हैं कि यूनियन में जो कर्मचारी कार्यरत हैं. उनमें से कभी कभार ही उच्च शिक्षा ऋण का आवेदन होगा या नगण्य होगा. 25 कर्मचारियों में अधिकतर के बच्चों ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर लिया है.

::: इन्होंने सुनाया दुखड़ा :::

सुल्तान अलकान, विनोद कुमार, डॉ. एम एस सिंह, रजल कुमार, मोहनसे, एसके रॉय, रतन कुरत किंडे, कृष्णा सिंह, ज्योति कुमार, बिरेन्दर महेतो, अरविन्द कुमार, उत्तम कुमार महतो, प्रवीण, रोहित कुमार सिंह, मृगल सोलंकी, संजय सिंह, एन बेलगे, एन बालाजी, सोंगत डे, सुरोजत डे, धन कुमार गुनग, अमित थापा, कुही देवी, श्रवण कुमार, कमला, कमला सेवी, शमशाद बेगम आदि.

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