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The kidnappers free Kairav : अपहरण के बाद कैरव की आंखों में बांध दी थी पट्टी, खाने–पीने में नहीं की कोई कमी, बिहार से झारखंड शिफ्ट करने के दौरान चौपारण-बरही के पास कार से उतारकर भागे बदमाश

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फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर के उधमी पुत्र कैरव गांधी को करीब 15 दिनों बाद अपहरणकर्ताओं ने मुक्त कर दिया है. जब मंगलवार सुबह पुलिस उसे लेकर घर पहुंची तो परिजनों के चेहरे अपने पुत्र को देखकर खुशी से खिल उठे. गत 13 जनवरी को कदमा–सोनारी लिंक रोड से कैरव का अपहरण करने के बाद ही कैरव की आंखों में पट्टी बांध दी गई थी. इसके बाद उसे कहां ले जाया गया इसकी जानकारी कैरव को नहीं है. हालांकि इस दौरान उसके खाने–पीने में कोई कमी नहीं हुई. अपहरणकर्ताओं ने कैरव को तीन अलग–अलग जगहों में भी शिफ्ट किया, पर उसे इस दौरान कहां रखा गया इसकी जानकारी कैरव को नहीं है.

एनएच 2 पर सड़क पर छोड़ भागे अपहरणकर्ता

पुलिस को सूचना मिली थी कि अपहरणकर्ता कैरव को झारखंड के बुंडू, डाल्टनगंज के रास्ते बिहार के औरंगाबाद और फिर नालंदा लेकर चले गए थे. पुलिस लगातार इन संभावित इलाकों में छापेमारी कर रही थी. इसी दौरान पुलिस को पता चला कि अपहरणकर्ता कैरव को बिहार से झारखंड शिफ्ट करने की तैयारी कर रहे हैं. इसके बाद पुलिस ने बिहार–झारखंड बॉर्डर पर नाकेबंदी कर दी. चौपारण–बरही के पास पुलिस को एक संदिग्ध कार आती दिखी. पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास भी किया, पर वह कार थोड़ी दूर जाकर रुकी,जिसमें से अपहरणकर्ताओं ने कैरव को धक्का मारकर बाहर गिरा दिया और फिर बिहार की ओर फरार हो गए. पुलिस अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं कर पाई है.

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कैरव को पहचान नहीं पाई पुलिस

कैरव की जब रिहाई हुई उस वक्त कैरव को मूछें और दाढ़ी बढ़ चुकी थी, जिस कारण पुलिस उसे पहचान नहीं सकी. हालांकि कैरव ने खुद ही अपना परिचय दिया,जिसके बाद पुलिस ने उसे रेस्क्यू करते हुए उसके परिजनों को सूचित किया. पुलिस ने तड़के 4.30 बजे कैरव को उसके परिजनों को सौंप दिया.

इधर, कैरव के घर वापसी के बाद घर पर त्योहार जैसा माहौल है.  उसके घर पर कई नेता और परिजनों के अलावा कंपनी के कर्मचारी मिलने पहुंच रहे हैं. पश्चिमी जमशेदपुर विधायक सरयू रायऔर सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मानव केडिया भी कैरव के घर पहुंचे और उसका हाल चाल जाना.

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