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Jamshedpur : शिक्षक पात्रता परीक्षा में भोजपुरी, मगही एवं अंगिका की उपेक्षा जनहित के खिलाफ : अप्पू तिवारी

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फतेह लाइव, रिपोर्टर.

भोजपुरी नव चेतना मंच के प्रांतीय अध्यक्ष अप्पू तिवारी ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर झारखंड प्रदेश में आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (J-TET) में भोजपुरी, मगही एवं अंगिका भाषाओं को शामिल नहीं किए जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर जनभावनाओं की अनदेखी और क्षेत्रीय भाषाओं के साथ अन्याय बताया।

तिवारी ने कहा कि झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में भोजपुरी, मगही एवं अंगिका भाषाएं व्यापक रूप से बोली और समझी जाती हैं। इसके बावजूद इन भाषाओं को परीक्षा से बाहर रखना न केवल लाखों अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन है, बल्कि यह सरकार की नीतिगत संवेदनहीनता को भी दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह निर्णय जनहित के विरुद्ध है और इससे समाज के विभिन्न वर्गों में आक्रोश व्याप्त हो रहा है।

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उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस मुद्दे पर अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया या ठोस पहल नहीं की गई है, जो समझ से परे है। विधायी स्तर पर भी इस विषय में चुप्पी बनाए रखना गंभीर चिंता का विषय है। यदि क्षेत्रीय भाषाओं को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो यह सांस्कृतिक असंतुलन और भाषाई असमानता को बढ़ावा देगा।

अप्पू तिवारी ने मांग की कि आगामी शिक्षक पात्रता परीक्षा में तत्काल प्रभाव से भोजपुरी, मगही एवं अंगिका भाषाओं को शामिल किया जाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।

अंत में उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता की आधारशिला हैं, इन्हें दरकिनार करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।

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