गुरु नानक देव जी की पावन वाणी ‘पवणु गुरु, पाणी पिता, माता धरत महत’ में प्रकृति संरक्षण और स्वच्छ जीवन का संदेश
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
दीपावली की वास्तविक तैयारी तभी सार्थक होगी, जब हम अपने घरों के साथ-साथ अपने मन, विचारों और पर्यावरण की भी स्वच्छता का संकल्प लें। स्वच्छता केवल घर की दीवारों, फर्श और सामान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे अपनी जीवनशैली और सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बनाना चाहिए। यह संदेश सिख धर्म प्रचारक, विचारक एवं युवा पथ प्रदर्शक ज्ञानी हरविंदर सिंह जमशेदपुरी ने शनिवार को संगत और आम जनता के नाम अपने संदेश में दिया।
गुरु नानक देव जी की पावन वाणी का उल्लेख करते हुए ज्ञानी हरविंदर सिंह जमशेदपुरी ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज प्रथम पातशाह श्री गुरु नानक देव जी की अमर वाणी ‘पवणु गुरु, पाणी पिता, माता धरत महत’ हमें प्रकृति के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और जिम्मेदारी का बोध कराती है। इसका भावार्थ है कि हवा गुरु के समान, पानी पिता के समान और धरती महान माता के समान है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हम अपने गुरु का सम्मान, पिता का आदर और माता की सेवा करते हैं, उसी प्रकार हवा, पानी और धरती की रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है। दीपावली पर घरों की सफाई के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि निकलने वाला कचरा सड़कों, नालियों, जलस्रोतों और खुले स्थानों पर न फेंका जाए। घर को स्वच्छ बनाने के नाम पर आसपास गंदगी फैलाना स्वच्छता नहीं, बल्कि सामाजिक और प्राकृतिक जिम्मेदारी से विमुख होना है।
ज्ञानी हरविंदर सिंह जमशेदपुरी ने संगत से अपील की कि घरों की सफाई के दौरान सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखें। प्लास्टिक एवं अन्य अनुपयोगी वस्तुओं का उचित निस्तारण करें, पानी की बर्बादी रोकें और सफाई में इस्तेमाल होने वाले रसायनों को नालियों तथा जलस्रोतों में बहाने से बचें। उन्होंने दीपावली पर पटाखों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले वायु एवं ध्वनि प्रदूषण के प्रति भी समाज को जागरूक रहने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा, “हम दीपावली पर अपने घरों के हर कोने से धूल और गंदगी निकालते हैं, लेकिन हमें अपने मन से अहंकार, ईर्ष्या, नफरत और स्वार्थ की गंदगी भी निकालनी चाहिए। गुरु साहिब की वाणी हमें केवल पूजा-पाठ का संदेश नहीं देती, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की सीख भी देती है। यदि हवा स्वच्छ नहीं होगी, पानी निर्मल नहीं होगा और धरती प्रदूषित होगी, तो हमारी खुशियां और उत्सव भी अधूरे रह जाएंगे।”
अंत में ज्ञानी हरविंदर सिंह जमशेदपुरी ने संगत और विशेषकर युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वच्छता को केवल एक दिन का अभियान न बनाएं, बल्कि इसे अपनी आदत और संस्कार बनाएं। प्रत्येक परिवार अपने घर के साथ गली, मोहल्ले और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी निभाए।उन्होंने कहा कि सच्ची दीपावली वही है, जिसमें घरों में दीप जलें, मन में प्रेम का प्रकाश फैले और प्रकृति भी स्वच्छ एवं सुरक्षित रहे।


































