रैयतदार के पोते ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की, जमीन रजिस्ट्री कराने के लिए फर्जी कागजात तैयार करने का भी आरोप
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
बिहार के भोजपुर जिले के अगिआंव अंचलाधिकारी वागिशा सिंह और एक कर्मचारी पर जमाबंदी में कथित छेड़छाड़ कर जमीन बेचने वाले हिस्सेदार का नाम दोबारा दर्ज करने का आरोप लगा है। इस मामले में रैयतदार के पोते विशाल कुमार, पिता कौशल प्रसाद ने भोजपुर के जिलाधिकारी मनेश कुमार मीणा को 12 अक्टूबर को आवेदन देकर शिकायत की है। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।

जिलाधिकारी को दिए गए आवेदन के अनुसार, अगिआंव अंचल के वरुणा मौजा स्थित खाता संख्या 215 पूर्व में मेघनाथ भगत के नाम से दर्ज था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक हिस्सेदार ने अपने हिस्से की जमीन बेच दी थी, जिसके बाद तत्कालीन अंचलाधिकारी और कर्मचारी ने उसका नाम जमाबंदी से हटा दिया था। शिकायत में दावा किया गया है कि इस संबंध में मूल पंजी में भी स्पष्ट उल्लेख है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान अंचलाधिकारी और कर्मचारी ने कथित तौर पर बिचौलिये एवं वरुणा निवासी कामेश्वर यादव के दबाव में जमाबंदी संख्या 10, पृष्ठ संख्या 442, वर्तमान भाग 3 में बेचे गए हिस्से के विक्रेता का नाम दोबारा जोड़ दिया।
शिकायत के मुताबिक, संबंधित जमाबंदी में खेसरा संख्या 106, 218, 554, 556, 723 और 728 की जमीन दर्ज है। निबंधित केवाला संख्या 249, दिनांक 19 जनवरी 1980 के अनुसार इन खेसरों में क्रमशः 2, 1, 5, 13, 8 और 43 डिसमिल जमीन का उल्लेख है। आरोप है कि संबंधित हिस्सेदार द्वारा जमीन बेचने और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद जमाबंदी में उसका नाम फिर से जोड़ दिया गया।
हिस्सेदार के रकबे में भी वृद्धि का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जमाबंदी में नाम दोबारा जोड़ने के साथ ही संबंधित हिस्सेदार के जमीन के रकबे में भी कथित तौर पर वृद्धि कर दी गई। आवेदन में आशंका जताई गई है कि बिचौलियों और कथित भूमाफिया की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की रजिस्ट्री कराने की कोशिश की जा रही है।
परिवार को धमकी देने का भी आरोप
आवेदन में शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि जमीन विवाद को लेकर परिवार के सदस्यों को अलग-अलग तरीके से जान से मारने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर जमाबंदी से संबंधित अभिलेखों की जांच कराने, कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने और परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।
फिलहाल, मामले में संबंधित अंचलाधिकारी और कर्मचारी का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है। प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।


































