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Jharkhand Politics Big News : ज्येष्ठ पुत्र सोमेश को मिला रामदास सोरेन का राजनीतिक उत्तराधिकार, घाटशिला उप-चुनाव पर सबकी नजर, हेमंत सोरेन की भी हुई रजामंदी, वरिष्ठ पत्रकार अश्विनी रघुवंशी से खास बातचीत

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पिता के निधन से खाली हुई घाटशिला सीट पर तानेंगे तीर कमान

चंपई पुत्र बाबूलाल से हो सकता है रामदास पुत्र का आमना-सामना

बिहार चुनाव के दौरान घाटशिला का उप चुनाव होने की संभावना

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

झारखंड के शिक्षा सह निबंधन मंत्री रहे रामदास सोरेन का राजनीतिक उत्तराधिकार उनके ज्येष्ठ पुत्र सोमेश सोरेन संभालेंगे। रामदास सोरेन के निधन के बाद उनके परिवार के भीतर चिंतन मनन के बाद आपसी सहमति से उत्तराधिकार तय हो गया। अब चचेरे भाई विक्टर सोरेन और मंगल सोरेन के साथ मिल कर सोमेश सोरेन को अपने पिता के राजनीतिक उत्तराधिकार को न सिर्फ संभालना है बल्कि उसे आगे भी बढ़ाना है। झामुमो अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी सोरेन परिवार के उत्तराधिकार के फैसले का सम्मान करते हुए अपनी रजामंदी जताई है। हेमंत सोरेन की इच्छा रही कि रामदास सोरेन के अंतिम संस्कार से लेकर श्राद्ध भोज में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। यही वजह है कि प्रशासन ने अंतिम संस्कार से जुड़े सारे आयोजन में महती भूमिका निभाई।

स्व. रामदास सोरेन, झारखंड के पूर्व मंत्री और बाबूलाल सोरेन को पटकनी देने वाले

 

खैर, रामदास सोरेन के निधन से उनकी घाटशिला विधानसभा सीट खाली हो गई है। संभावना है कि बिहार विधानसभा चुनाव के साथ चुनाव आयोग अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित घाटशिला विधानसभा सीट पर उप चुनाव भी कराए। ऐसे में नवंबर तक घाटशिला में उप चुनाव हो जाएगा।

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फाइल फोटो, सीएम के रामदास सोरेन के आवास आने और शोकाकुल परिजनों को सांत्वना देने की.

 

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का श्राद्ध कार्य को हेमंत सोरेन ने समाप्त किया था कि रामदास सोरेन का स्वर्गवास हो गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ रामदास सोरेन के घोड़ाबांधा आवास आए थे। भाई, पत्नी, बेटा, बेटी और भतीजों से मिल कर उन्हें सांत्वना दी। उसी दौरान उन्हें जानकारी दी गई कि रामदास की जवाबदेही परिवार में सोमेश संभालेंगे।

दिशोम गुरु का आशीर्वाद रहा है वरीय पत्रकार रघुवंशी पर

 

सोमेश सोरेन राजनीति में बिल्कुल नए चेहरे है। रामदास सोरेन के साथ राजनीतिक गतिविधियों में भतीजे विक्टर सोरेन और मंगल सोरेन सक्रिय रहे है। घाटशिला के गांवों में विक्टर और मंगल को जानने, पहचानने और मानने वाले हैं। उनका परिवार संयुक्त है। इस नाते एका भी बनी हुई है। रामदास सोरेन के दिवंगत होने के बाद सहानुभूति का लाभ उनकी पत्नी या बेटा के ही चुनावी मैदान में उतरने पर अधिक मिलेगा। विक्टर और मंगल की भूमिका भी वास्तव में बड़ी होगी।

वरिष्ठ पत्रकार अश्विनी रघुवंशी

अभी यह तय नहीं है कि घाटशिला उप चुनाव में भाजपा का चेहरा कौन होगा। उप चुनाव में समय भी है। पूर्व सीएम चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ने पिछली बार रामदास सोरेन के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उनकी चर्चा अधिक है। उनके करीबी सक्रिय भी दिख रहे है।
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से तीन बार चुनाव जीत चुके प्रदीप कुमार बलमुचू पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। बलमुचू का आज भी घाटशिला में मजबूत जनाधार है। बलमुचू से लड़कर ही रामदास सोरेन ने घाटशिला सीट झामुमो के पाले में डाला था।

करो या मरो के बनते दिख रहे हालत

झारखंड की राजनीति के जानकार वरिष्ठ पत्रकार अश्विनी रघुवंशी बताते हैं कि अगर बारीकी से देखे तो घाटशिला की राजनीति में करो या मरो के हालात बनते दिख रहे हैं। झारखंड का गठन होने के बाद घाटशिला और प्रदीप बालमुचू एक दूसरे के पर्याय बने हुए थे। कोई सोच नहीं सकता था कि वहां तीर कमान के लिए जगह भी बन सकती है। पुराना चुनावी इतिहास भी झामुमो के हक में नहीं दिखता था। ऐसे प्रतिकूल हालात में रामदास सोरेन ने घाटशिला की चुनावी राजनीति में जगह बनाई। पहले निर्दल लड़ कर अपना लोहा मनवाया। लोगों को भरोसा हुआ तो अगली बार झामुमो के टिकट पर पहली बार घाटशिला में परचम लहराया।

झारखंड की पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक वक्त गुजार चुके अश्विनी रघुवंशी कहते हैं कि ऊपर की इतनी कहानी बताने का आशय यह है कि सोमेश सोरेन को पिता की विरासत को आगे बढ़ाना है तो जमीनी स्तर पर लगातार काम करना होगा, लगातार करना होगा, वह भी विनम्र भाव के साथ। सोमेश सोरेन को उप चुनाव जीतना ही होगा वरना आगे राजनीति में टिके रहना बेहद मुश्किल होगा। उतनी ही कठिन होगी वापसी। संभावना है कि चम्पई पुत्र बाबूलाल सोरेन को फिर से भाजपा का टिकट मिले। उतना तगड़ा दावेदार फिलहाल कोई और नहीं दिखता। सहानुभूति के माहौल में चुनाव लड़ना वैसे भी आसान नहीं होता। यदि चुनाव में हार होती है तो बाबूलाल के लिए घाटशिला में आगे की चुनावी राह बेहद पथरीली हो जाएगी।

अश्विनी रघुवंशी बताते हैं कि रामदास सोरेन जमीनी नेता रहे हैं।
लंबी नाकामी देखी। हार नहीं मानना और मंजिल पाने की जिद से उन्हें मुकाम हासिल हुआ। उनके पुत्र सोमेश को सियासत में बहुत कुछ सीखना है। अच्छी बात है कि उन पर कोई दाग नहीं है। नया चेहरा है। भाजपा यदि बाबूलाल सोरेन को उम्मीदवार बनाती है तो घाटशिला में कोई आश्वस्त नहीं हो सकता।

हेमंत सोरेन की भरपूर कोशिश होगी कि घाटशिला का किला फतेह करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रखी जाय। हेमंत सोरेन समेत झामुमो में सब जानते है कि तनिक भी मौका मिला तो चंपई चूकेंगे नहीं।

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