Jamshedpur Kidnapping Case : हाई प्रोफ़ाइल अपहरण मामला- कैरव गांधी को घर सौंपते ही पुलिस ने कर दी ताबड़तोड़ कार्रवाई

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अब भी लोगों के बीच अनसुलझी पहेली बनी है यह दास्तां, 2025 से चल रही थी रेकी

छह लोगों की गिरफ्तारी हुई, दो कारें हो गई बरामद, जमशेदपुर से भी एक गिरफ्तार

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

जमशेदपुर के युवा उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले में अब रोज नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. 14 दिनों तक चले हाई-प्रोफाइल अपहरणकांड का मंगलवार को पटाक्षेप उस वक्त हुआ, जब पुलिस ने बिहार–झारखंड सीमा क्षेत्र से कैरव गांधी को सकुशल बरामद कर लिया. हालांकि शुरुआत में पुलिस की ओर से किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई थी, लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि इस मामले में पुलिस अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि कैरव गांधी का अपहरण कोई तात्कालिक घटना नहीं, बल्कि महीनों पहले रची गई एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी. इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड गया निवासी सिंह साहब बताया जा रहा है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इसके अलावा अपहरणकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर मदद पहुंचाने वाले जमशेदपुर के एक युवक को भी पुलिस ने दबोच लिया है. जांच एजेंसियों का मानना है कि बिना स्थानीय सहयोग के इतना बड़ा अपराध अंजाम देना संभव नहीं था.

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि अपहरणकर्ता कैरव गांधी को लेकर झारखंड की ओर स्थान बदलने की फिराक में हैं. इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तुरंत बिहार–झारखंड बॉर्डर पर व्यापक नाकेबंदी कर दी. इसी दौरान एक संदिग्ध वाहन की गतिविधियों पर नजर रखी गई. वाहन के मूवमेंट की पुष्टि होते ही पुलिस टीम ने पीछा किया और अंततः अपहरणकर्ताओं को दबोच लिया. इसी कार्रवाई के दौरान कैरव गांधी को सुरक्षित मुक्त कराया गया.

इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस ने बेहद चालाक और रणनीतिक रवैया अपनाया. मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने के बावजूद पुलिस ने जानबूझकर उनकी गिरफ्तारी सार्वजनिक नहीं की. इसके बजाय यह संदेश फैलाया गया कि आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए हैं. पुलिस की इस रणनीति का सीधा फायदा यह हुआ कि अन्य आरोपी बेखौफ होकर संपर्क में आए और इसी दौरान पुलिस को अहम जानकारियां हाथ लगीं. इन्हीं सुरागों के आधार पर गया और नालंदा में एक के बाद एक छापेमारी की गई, जहां से मुख्य साजिशकर्ता सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने अपहरण में प्रयुक्त दो पिस्तौल और दो कार भी बरामद की हैं. जांच में खुलासा हुआ है कि पुलिस को भ्रमित करने के लिए अपहरण के बाद गाड़ियों की अदला-बदली की गई थी. एक वाहन से कैरव गांधी को औरंगाबाद की ओर ले जाया गया, जबकि दूसरी कार को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया होते हुए बिहार की दिशा में भेजा गया. इसका उद्देश्य जांच एजेंसियों को अलग-अलग दिशाओं में उलझाना था. हालांकि पुलिस पहले से ही दोनों वाहनों को लेकर सतर्क थी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी.

पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया है कि अपहरण की तैयारी काफी पहले शुरू हो चुकी थी. अक्टूबर 2025 में पहली बार अपहरणकर्ता जमशेदपुर पहुंचे थे और कैरव गांधी की गतिविधियों की रेकी शुरू की गई थी. इस दौरान शहर के एक युवक ने उन्हें कैरव की दिनचर्या, आवागमन, समय और संभावित लोकेशन से जुड़ी अहम जानकारियां उपलब्ध कराईं. कई हफ्तों तक निगरानी के बाद लिंक रोड को अपहरण के लिए सबसे सुरक्षित और मुफीद स्थान माना गया.

फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे. पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. कैरव गांधी की सकुशल बरामदगी के बाद जहां उनके परिवार ने राहत की सांस ली है, वहीं पुलिस की रणनीति और कार्रवाई की भी व्यापक सराहना हो रही है.

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