फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर के मरीन ड्राइव पर सड़क किनारे खड़े ट्रक से कार की टक्कर में चार बच्चों की मौत बेहद हृदयविदारक घटना है। इस हादसे ने टाटा कंपनी और जिला प्रशासन की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि सड़क पर कोई वाहन खराब होता है, तो उसे तत्काल क्रेन/रिकवरी वाहन के माध्यम से सुरक्षित स्थान पर हटाने की व्यवस्था होनी चाहिए। यदि इस मार्ग पर टोल वसूला जा रहा है, तो सड़क की सुरक्षा और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
टाटा कंपनी के बड़े-बड़े वाहन और भारी ट्रक शहर की कई सड़कों के किनारे लंबे समय तक खड़े रहते हैं। मरीन ड्राइव हो या बर्मामाइंस क्षेत्र—कई जगह सड़क किनारे भारी वाहनों की कतारें और सड़क पर बने गड्ढे यातायात के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। कई स्थानों पर सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि वाहन चालकों को मजबूरी में अचानक दिशा बदलनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।साथ ही भुईयांडीह बस स्टैंड से लेकर एमजीएम अस्पताल सहित शहर के अन्य प्रमुख मार्गों पर खड़े भारी वाहन खड़े रहते हैं।
सवाल यह है कि सड़क किनारे खड़े इन भारी वाहनों और सड़क के बीच बने गड्ढों पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ती? चलती गाड़ियों का चालान काटना आसान है, लेकिन सड़क पर खड़े खतरनाक वाहनों और खराब सड़क व्यवस्था पर कार्रवाई कब होगी?
चार परिवारों के चिराग बुझ गए हैं। अब केवल आश्वासन नहीं, जवाबदेही और कार्रवाई चाहिए। टाटा कंपनी और जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करें कि सड़क पर खड़ा ट्रक कितनी देर से था, उसकी सूचना किसे थी और उसे समय रहते हटाया क्यों नहीं गया।
मरीन ड्राइव, गोलमुरी, टेल्को, टिनप्लेट और खासकर बर्मामाइंस और शहर के अन्य प्रमुख मार्गों पर भारी वाहनों के लिए निर्धारित पार्किंग/स्टैंड की व्यवस्था की जाए तथा सड़क किनारे खड़े रहते है वाहनों को तत्काल हटाया जाए।टिनप्लेट से लेकर बारीडीह तक सड़क के किनारे बड़ी संख्या में भारी वाहन खड़े रहते हैं। कई जगह ये वाहन यातायात में बाधा बनने के साथ-साथ दुर्घटना का गंभीर खतरा पैदा करते हैं
टोल वसूली के साथ सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
जमशेदपुर की सड़कों को केवल सुंदर बनाने से काम नहीं चलेगा, उन्हें सुरक्षित बनाना भी जरूरी है। लोगों की जान से बड़ा कोई टोल, कोई व्यवस्था और कोई संस्थागत दायित्व नहीं हो सकता।अब सिर्फ आश्वासन नहीं चलेगा। प्रशासन और टाटा कंपनी ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो खिलाफ पुरजोर जनआंदोलन किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों के समक्ष लोकतांत्रिक तरीके से जोरदार विरोध दर्ज कराया जाएगा।




































