फतेह लाइव, रिपोर्टर।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पोलित ब्यूरो ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को तुरंत रोकने की मांग की है।
पार्टी के धनबाद जिला सचिव विकास कुमार ठाकुर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इंडियन एक्सप्रेस में 23 सितंबर को SIR को लेकर हुए खुलासों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CPI(M) ने कहा है कि रिपोर्टों के अनुसार तीन चुनाव आयुक्तों में से दो ने वोटर लिस्ट संशोधन और SIR प्रक्रिया से जुड़े कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी। कानून के अनुसार तीनों चुनाव आयुक्त बराबर होते हैं और मतभेद को बहुमत या सर्वसम्मति से सुलझाया जाना चाहिए, लेकिन CEC ने साथी आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर अपनी राय थोपी।
पोलित ब्यूरो ने कहा, “CEC का यह दावा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और विकेंद्रीकृत है, गलत साबित हुआ है। पिछले कुछ महीनों में व्यवस्था को इतना केंद्रीकृत कर दिया गया है कि पता ही नहीं चलता कि असल में फैसले कौन ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता और नोटिस जारी करने के यांत्रिक तरीके पर चिंता जताई है।”
पार्टी ने कहा कि यह मामला सिर्फ SIR तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की संस्थागत निष्पक्षता, चुनावी पारदर्शिता और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की सुरक्षा से जुड़ा है। एक निष्पक्ष संस्था के तौर पर ECI की विश्वसनीयता दांव पर है और इसके लिए CEC ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
CPI(M) ने मांग की है कि ECI की निष्पक्षता बहाल करने के लिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले मौजूदा कानून को खत्म कर नया कानून बनाया जाए और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली चयन समिति का गठन किया जाए।




































