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Amritsar/Jamshedpur : अलविदा जसबीर मत्तेवाल, कविशरी की एक जोशीली आवाज हुई बंद, ससुर और दामाद एक चिता में पंचतत्व में विलीन, अंतिम संस्कार का देखें – Video, पंथ की महान हस्तियां हुई शामिल, सन 1989 में बिल्ला ने मत्तेवाल के साथ पहली बार की थी कविशरी

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फतेह लाइव, रिपोर्टर.

पंजाब के अमृतसर स्थित गांव वरपाल में रविवार को सिख पंथ के उभरते कविशर जसबीर सिंह मत्तेवाल की आवाज सदियों के लिए बंद हो गई. यहां जसबीर उनके दामाद हरचरण प्रीत सिंह वरपाल को एक चिता में सिख पंथ की मर्यादा के तहत अंतिम संस्कार किया गया. सिख पंथ की कई प्रमुख हस्तियां अंतिम संस्कार में शामिल हुई. उधर, घटना में तीसरे साथी गुरप्रीत सिंह का अंतिम संस्कार उनके गांव तरसिका में किया गया. जसबीर और उनके दामाद के अंतिम संस्कार में अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह, दल पंथ बाबा बिधी चंद साहेब वाले बाबा अवतार सिंह, तरना दल के मुखी बाबा मेजर सिंह, हरिया बेला वाले बाबा जोगा सिंह, अकाल तख्त साहेब के पांच प्यारे, दरबार साहेब के अरदासिये, संत भूरी वाले बाबा सुखविंदर सिंह, पंथ प्रसिद्ध कथावाचक जसविंदर सिंह शहूर, पश्चिम बंगाल के चंद्रकोना गुरुद्वारा साहेब के मुख्य सेवादार जतिन्दरपाल सिंह, जमशेदपुर सीजीपीसी के महासचिव गुरचरण सिंह बिल्ला, सलाहकार सुरेन्द्र सिंह शिंदे, सेंट्रल नौजवान सभा के प्रधान अमरीक सिंह समेत भारत के कोने कोने से उनके सगे संबंधी, चाहने वाले इस दुख की घड़ी में शामिल हुए और माता पिता जोगिंदर सिंह, पत्नी, बेटा अमरबीर सिंह, बेटी के साथ दुख बांटा.

मालूम हो कि मत्तेवाल के दामाद दरबार साहेब के हेडग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह के पुत्र थे. जमशेदपुर से जो जसबीर को चाहने वाले अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके उन्होंने भी उनके संस्कार का वीडियो देखा और आंखें नम हो गई. जसबीर पटना साहेब अकाल तख्त साहेब धर्म प्रचार कमेटी के सदस्य थे. कुछ दिन पहले ही वह जमशेदपुर होते हुए कानपुर में समागम करते हुए पंजाब पहुंचे थे. फिर कोलकाता लौट रहे थे, जहां यह घटना घट गई.

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मां और बेटी का उजड़ गया सुहाग

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर स्थित खागा के पास दो दिन पूर्व सड़क हादसे में जसबीर मत्तेवाल उनके दामाद और गुरप्रीत सिंह तरसिका की मौत हो गई थी. इस दर्दनाक घटना में तीन जिंदगीयां समाप्त हो गई. मत्तेवाल पंजाब से कोलकाता के शहीदी पर्व में धार्मिक कार्यक्रम करने के लिए आ रहे थे. ससुर और दामाद के गुजर जाने से सास और बेटी का सुहाग उजड़ गया. अंतिम संस्कार में वरपाल गांव में उनका दुख किसी से देखा नहीं जा रहा था. सभी वाहेगुरु से अरदास कर रहे थे और ऐसी अनहोनी किसी के साथ ना हो.

मत्तेवाल के साथी बिल्ला ने दुख पर शोक जताया

मत्तेवाल की घटना में मौत की खबर मिलने के बाद जमशेदपुर से उनके करीबी साथी गुरचरण सिंह बिल्ला घटनास्थल की ओर गए थे. उनके साथ सीजीपीसी के सलाहकार सुरेन्द्र सिंह शिंदे, सेंट्रल नौजवान सभा के प्रधान अमरीक सिंह भी गए थे. जमशेदपुर से मत्तेवाल के बेटे को भी संभालते हुए ले जाया गया. यूपी में शवो के पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शनिवार रात शवों को अमृतसर के रामदास अस्पताल में रखवाया गया. उसके बाद रविवार को अंतिम संस्कार होने तक उन्होंने परिवार को संभालते हुए सभी विधान निपटाए. नम आँखों से बिल्ला ने अपने साथी की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि सन 1989 में पहली बार टिनप्लेट गुरुद्वारा में समागम में जसबीर के साथ पहली बार कविशरी गायन की थी. तब जसबीर ने उसे 60 रूपये दिए थे. उसके बाद उनका प्यार बढ़ता गया. परिवार से जुड़ाव हो गया. जसबीर उस लिहाज से उनके गुरु थे. आज जो दुखदाई घटना घटी है वाहेगुरु के भाणे में रहकर सभी कार्य हो गए लेकिन जसबीर की यादें हमेशा रहेंगी. उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है ऐसा दुख वाहेगुरु दुश्मन को भी नहीं दिखाए.

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