साहित्य, एआई, तकनीक और सामाजिक सेवा से जुड़े सत्रों में नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने जाना अपनी संभावनाओं का विस्तार
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
धनबाद स्थित बी.आई.टी. सिंदरी में नवप्रवेशित बी.टेक. विद्यार्थियों के लिए आयोजित इंडक्शन कम ओरिएंटेशन प्रोग्राम 2026-30 के नौवें दिन गुरुवार को साहित्यिक, प्रेरणादायक, तकनीकी और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े विभिन्न सत्र आयोजित किए गए।

दिन की शुरुआत लिटरेरी सोसाइटी के ओरिएंटेशन सत्र से हुई। इसमें विद्यार्थियों को संस्थान की साहित्यिक गतिविधियों तथा बी.आई.टी. सिंदरी की सांस्कृतिक एवं रचनात्मक परंपराओं से परिचित कराया गया।

इसके बाद विशेष वक्ता सत्र का शुभारंभ प्रो. (डॉ.) आर. के. वर्मा ने किया। डॉ. निरुपमा ने मुख्य वक्ता हर्षवर्धन सिंह, आईआरएएस, डिविजनल फाइनेंस मैनेजर, धनबाद का परिचय कराया।
अपने संबोधन में हर्षवर्धन सिंह ने विभिन्न क्षेत्रों और उद्योगों में बी.आई.टी. सिंदरी के पूर्व विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति का जिक्र किया। उन्होंने विद्यार्थियों को स्कूल से कॉलेज और फिर इंजीनियरिंग शिक्षा के नए माहौल में प्रवेश के बदलाव को समझते हुए आगे बढ़ने की सलाह दी।
उन्होंने विद्यार्थियों से भीड़ का अनुसरण करने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाने का आह्वान किया। आधुनिक तकनीकी दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी विद्यार्थी की शाखा उसकी संभावनाओं की सीमा तय नहीं करती।
उन्होंने विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए 4Cs—Competence, Curiosity, Communication और Character को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही एआई को शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय सार्थक और उपयोगी कार्यों के लिए एक प्रभावी साधन के रूप में अपनाने की सलाह दी।
सत्र के दौरान सीडीसी चेयरमैन प्रो. डॉ. घनश्याम और बी.आई.टी. सिंदरी के निदेशक प्रो. डॉ. पंकज राय ने मुख्य वक्ता को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
दोपहर के सत्र में आईएसटीई स्टूडेंट्स चैप्टर की ओर से विद्यार्थियों को तकनीकी गतिविधियों और उनमें सहभागिता के अवसरों की जानकारी दी गई। वहीं रोटरैक्ट क्लब के सत्र में सामाजिक सेवा, नेतृत्व क्षमता और क्लब की विभिन्न गतिविधियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रो. (डॉ.) आर. के. वर्मा, चेयरमैन इंडक्शन प्रोग्राम, प्रो. (डॉ.) राहुल कुमार, कन्वेनर इंडक्शन प्रोग्राम तथा प्रो. संजय पाल का सक्रिय योगदान रहा। इसके अलावा प्रो. विजय कुमार बेसरा, डॉ. सोमनाथ साहा, प्रो. जितेंद्र कुमार, डॉ. उस्निस बनर्जी, डॉ. प्रियंका कुमारी, डॉ. कोमल कुमारी, डॉ. शबनम स्वाती मिंज, प्रो. प्रशांत रंजन मालवीय और छात्र समन्वयकों ने कार्यक्रम में विशेष सहयोग दिया।



































