फतेह लाइव, रिपोर्टर।
पद्म भूषण से सम्मानित झारखंड आंदोलन के महानायक एवं ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा द्वारा जिला मुख्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों आंदोलनकारियों ने शिबू सोरेन के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मोर्चा के प्रदेश प्रमुख देबू महतो ने कहा कि दिशोम गुरु केवल एक जननेता नहीं थे, बल्कि झारखंड ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया में आदिवासी समाज की अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों के सबसे सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा, आदिवासी-मूलवासी अस्मिता तथा सामाजिक न्याय की लड़ाई को जनआंदोलन का स्वरूप दिया और झारखंड राज्य के निर्माण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर शिबू सोरेन ने वंचितों, शोषितों, किसानों, मजदूरों और आम जनता की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, सम्मानजनक जीवन, लोकतांत्रिक अधिकारों और समावेशी विकास के लिए उनका संघर्ष सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उनका योगदान केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की राजनीति को नई दिशा देने वाला रहा। विश्वभर में आदिवासी समुदायों के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदायों की भागीदारी के लिए उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
इस दौरान देबू महतो ने राज्य सरकार का ध्यान आंदोलनकारियों की ओर आकर्षित करते हुए मांग की कि झारखंड आंदोलनकारियों से संबंधित लंबित कंडिकाओं (प्रावधानों) को समाप्त किया जाए तथा चिन्हित आंदोलनकारियों को मिलने वाली सम्मान राशि बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह की जाए।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नारायण महतो, ईश्वर मरांडी, रेघू साव, शिव शंकर महतो, बंशीधर महतो, पार्वती देवी, रमेश महतो, लाल मोहन महतो, सुनील कुमार, उमा यादव, बलदेव महतो, जंग बहादुर महतो, जीतू साव सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी एवं मोर्चा के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
















