सरायकेला: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर के बीटेक चौथे वर्ष (मेटालर्जी विभाग) के छात्र ताबीर के रविवार शाम असंगी चेक डैम में डूब जाने की आशंका के बाद पूरे संस्थान में हड़कंप मच गया। यह हादसा रविवार शाम करीब 4:00 बजे हुआ। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में एनआईटी के छात्र मौके पर पहुंच गए, लेकिन देर शाम तक ताबीर का कोई पता नहीं चल सका। इस दुखद घटना से नाराज छात्रों ने संस्थान के मुख्य प्रशासनिक भवन के सामने मुख्य सड़क को पूरी तरह जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि असंगी चेक डैम लंबे समय से एक संवेदनशील और खतरनाक स्थल के रूप में जाना जाता है, जहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद न तो वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई और न ही छात्रों या आम लोगों को सतर्क करने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए।
छात्रों का आरोप है कि बीते चार महीनों के भीतर इसी चेक डैम में डूबने से चार अन्य युवकों की भी जान जा चुकी है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बावजूद न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए, न बैरिकेडिंग की गई और न ही किसी प्रकार की निगरानी या सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए होते, तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था।
घटना की जानकारी मिलते ही आरआईटी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस ने छात्रों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर चेक डैम में छात्र की तलाश के लिए खोज एवं बचाव अभियान भी शुरू कराया गया। स्थानीय प्रशासन की निगरानी में राहत एवं बचाव कार्य देर शाम तक जारी रहा, लेकिन समाचार लिखे जाने तक छात्र का कोई सुराग नहीं मिल पाया था।
इस घटना के बाद एनआईटी परिसर में शोक और चिंता का माहौल है। बड़ी संख्या में छात्र अपने साथी के सुरक्षित मिलने की उम्मीद में घटनास्थल और परिसर में डटे रहे। वहीं, देर रात तक एनआईटी जमशेदपुर प्रबंधन या संस्थान के किसी आधिकारिक प्रवक्ता की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
छात्रों ने मांग की है कि असंगी चेक डैम को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया जाए, वहां स्थायी बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक जलाशयों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
















