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High Court : संपत्ति विवाद में बहन को मानसिक स्वास्थ्य केंद्र भेजने का मामला – हाईकोर्ट ने जमशेदपुर पुलिस की लगाई क्लास

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फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

जमशेदपुर में संपत्ति विवाद को लेकर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायाधीश संजय प्रसाद की खंडपीठ के सामने एक अमानवीय मामला आया. पीड़िता के अपने ही भाई ने माता-पिता से मिलकर उसे एक साल तक रांची पागलखाना (अब मानसिक स्वास्थ्य केंद्र) रिनपास में भर्ती कराकर उसे पागल (मानसिक रोगी) साबित करने की कोशिश की. इस दौरान पीड़िता के विभिन्न खातों में फिक्स डिपाजिट के रूप में जमा लगभग 40 लाख रुपए की रकम निकाल ली गई.

वहीं माता-पिता की संपत्ति में बहन को अलग-थलग कर भाई ने संपत्ति बेच दी. इतना ही नहीं, भाई ने पीड़िता के मंगेतर (रंजीत सिंह) के ऊपर अपनी बहन के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए उसे जेल भिजवाया. मंगेतर के जेल में रहने के दौरान पीड़िता को पागलखाने में यातना दी गई. हालांकि मामले में मंगेतर को जमानत मिल गयी. तब जाकर मंगेतर ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए रिट पिटीशन क्रिमिनल दाखिल कर युवती की खोज के लिए हेबियस कॉर्पस याचिका दायर किया.

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पीड़िता ने जमशेदपुर पुलिस से लगाई थी गुहार

सुनवाई के दौरान अदालत ने जमशेदपुर पुलिस को तलब किया. अदालत में जमशेदपुर पुलिस ने पहले यह जानकारी दी कि पीड़िता के मोबाइल पर कॉल करने पर कोई फोन नहीं उठा रहा है. वहीं दूसरे बयान में यह जानकारी दी गई कि उसे कॉल नहीं किया गया. इस दौरान युवती पागलखाने से निकल गयी. उसे अदालत में पेश किया गया. पीड़ित लड़की ने अदालत के समक्ष आपबीती सुनाई.

पीड़िता ने अदालत को बताया कि वह विदेश से पढ़ी लिखी है. उसने यूपीएससी जैसे प्रतिष्ठित परीक्षा भी दी है. उसे टाटा जैसी कंपनी से ऑफर भी मिला है. वह मानसिक रूप से पूर्ण रूप से स्वस्थ है. अदालत में उसने जानकारी दी कि मामले में उसने जमशेदपुर वरीय पुलिस अधीक्षक को लिखित बयान देते हुए यह बताया था कि उसकी जान को खतरा है. उसे घर वाले प्रताड़ित कर रहे हैं और भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना होने पर उसके परिवार के लोग जिम्मेदार होंगे. लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. खामियाजा युवती को भुगतना पड़ा. उसे कई तरह की यातनाएं झेलनी पड़ी.

हाईकोर्ट ने जमशेदपुर पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल

इस पर अदालत ने जमशेदपुर पुलिस को जमकर लताड़ा. अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दिनों-दिन पुलिसिया कार्रवाई महज खानापूर्ति बनकर रह गई है. आशंकाओं के मामले में पुलिस बेहद सुस्त है और घटना का इंतजार करती है. पहले ही अगर पुलिस सचेत हो जाए तो घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकती है. इधर हेबियस कॉर्पस याचिका को देखते हुए और युवती के मिल जाने का संतोष जाहिर किया गया. अदालत ने याचिका निष्पादित करते हुए पीड़िता के भाई को निर्देश दिया कि वह अपने माता-पिता को 70 लाख रूपये का फ्लैट उपलब्ध कराये.

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