फतेह लाइव, रिपोर्टर.
विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को पीएम श्री उत्क्रमित पीपुल्स अकादमी +2 विद्यालय में विविध सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को आदिवासी समाज की समृद्ध सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और विरासत से परिचित कराया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत आदिवासी नृत्य रहा। प्रिया एवं अनुपमा के निर्देशन में छात्राओं ने पारंपरिक आदिवासी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों की खूब सराहना बटोरी। नृत्य के माध्यम से छात्राओं ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विविधता, सामूहिकता और प्रकृति के प्रति उसके गहरे जुड़ाव को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। पारंपरिक अंदाज में दी गई प्रस्तुति ने विद्यालय के वातावरण को पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में रंग दिया।
इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक प्रकाश महता ने झारखंड, भारत एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी समाज की सभ्यता एवं संस्कृति विषय पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विद्यार्थियों को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने आदिवासी समुदायों की जीवनशैली, परंपराओं, सामाजिक संरचना, कला, लोक संस्कृति तथा प्रकृति के साथ उनके सदियों पुराने संबंधों पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि आदिवासी समाज की संस्कृति केवल उसकी पहचान का हिस्सा नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की प्राचीन एवं महत्वपूर्ण विरासत है, जिसके संरक्षण की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक वर्ग की है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने आदिवासी संस्कृति एवं विश्व आदिवासी दिवस से संबंधित विभिन्न विषयों पर आकर्षक पोस्टर भी तैयार किए। बच्चों द्वारा बनाए गए पोस्टरों का विद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया गया। पोस्टरों के माध्यम से विद्यार्थियों ने आदिवासी संस्कृति, प्रकृति संरक्षण, जल-जंगल-जमीन, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक अधिकारों जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।
इसके पूर्व विद्यालय की प्रातःकालीन सभा में प्राचार्य चंद्रदीप पाण्डेय ने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समुदायों की पहचान, अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसके संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने का आह्वान किया।
प्राचार्य ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को देश की विविध सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना भी है। आदिवासी समाज की परंपराओं और प्रकृति के साथ उसके संतुलित संबंध से आज की पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कार्यक्रम ने न केवल बच्चों को आदिवासी संस्कृति की विविधता और समृद्धि से परिचित कराया, बल्कि उनमें अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना भी विकसित की।
















