WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.20 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.32
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.33 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.21
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.32 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.21 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.45.21 P
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.56.39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 12.53.50 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.56.40 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 5.57.06 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.01.52 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.01.53 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.01.53
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.06 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.20 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.45 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.46 PM
WhatsApp Image 2026-08-13 at 6.03.46

Jamshedpur : शिक्षा विभाग के तुगलकी फरमान से अभिभावकों को परेशानी : कुलबिंदर

SHARE:

फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

क़ौमी सिख मोर्चा अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने झारखंड के शिक्षा विभाग की आलोचना की है कि उनके तुगलकी फरमान से राज्य के निजी विद्यालय में पढ़ रहे विद्यार्थियों के अभिभावकों को परेशानी हो रही है।

शिक्षा विभाग द्वारा निजी विद्यालय प्रबंधन को यह आदेश जारी किया गया है कि वह अपने परिसर में पाठ्य पुस्तक, कॉपियों अथवा पाठ्येतर सामग्री या स्कूल ड्रेस की बिक्री नहीं होने देंगे। ना ही किसी पुस्तक विक्रेता की अनुशंसा करेंगे। यदि ऐसा किए जाने की शिकायत मिलती है और जांच में सही साबित होता है तो विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ विभाग कठोर कार्रवाई करेगा। यहां तक कि मान्यता अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र समाप्त किया जा सकेगा।

Gambhir Car Associate Motion Ads Motion Ads

विभागीय आदेश का यह असर हुआ है कि इस साल 2026 में विद्यालय परिसर में पुस्तक कॉपियों अथवा पाठ्येतर सामग्री का स्टॉल नहीं लगेगा। अब अभिभावक बाजारों में विभिन्न पुस्तक भंडार में जाकर अपने बच्चों की किताब कॉपियों को खरीदने को मजबूर हैं। जिन लोगों अथवा संगठनों द्वारा सरकार और विभाग के समक्ष यह शिकायत दी गई थी कि किताब बिक्री से भारी मुनाफा प्रबंधन को होता है। प्रबंधन कमीशन खोरी के लिए विद्यालय परिसर में स्टॉल लगवाते हैं।
यहां आलम यह है कि अभिभावक किताब दुकानों से जाकर किताब कॉपी खरीद रहे हैं। उन्हें किताब में प्रिंटेड मूल्य के आधार पर ही कीमत चुकानी पड़ रही है और वहां किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जा रही है।

झारखंड के मुख्यमंत्री जो, शिक्षा विभाग के भी प्रभारी है। उनके द्वारा इस दिशा में ध्यान दिया जाना चाहिए। जिससे अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो।

अभी-अभी

ਪੰਜਾਬੀ ਖ਼ਬਰਾਂ

Horoscope

Weather

और पढ़ें

हिंदी खबर