Jamshedpur : जसबीर सिंह गांधी की अंतिम अरदास में उमड़ा सिख समाज, साकची गुरुद्वारा में श्रद्धांजलि सभा के दौरान भावुक हुआ वातावरण

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फतेह लाइव, रिपोर्टर. 

गुरु घर की अतुलनीय सेवा में समर्पित तथा गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, साकची के कोषाध्यक्ष सरदार जसबीर सिंह गांधी की अंतिम अरदास मंगलवार को साकची गुरुद्वारा साहिब में श्रद्धा, सम्मान और गुरबाणी के मधुर स्वर के बीच संपन्न हुई। अंतिम अरदास में बड़ी संख्या में सिख संगत, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा शहर के गणमान्य लोगों ने उपस्थित होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

गुरुद्वारा साहिब का दीवान हॉल गुरबाणी कीर्तन और अरदास के दौरान अत्यंत भावुक वातावरण से भर गया। संगत ने दिवंगत जसबीर सिंह गांधी द्वारा गुरु घर, पंथ और समाज के लिए दी गई सेवाओं को याद करते हुए उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।

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इस अवसर पर साकची गुरुद्वारा के ट्रस्टी सरदार सतनाम सिंह सिद्धू, सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के चेयरमैन सरदार गुरमीत सिंह, सीजीपीसी के पूर्व प्रधान सरदार गुरमुख सिंह मुखे, युवा नेता सरदार सतबीर सिंह सोमू, बिष्टुपुर गुरुद्वारा के साबका प्रधान सरदार गुरचरण सिंह भोगल, सरदार रणधीर सिंह, सरदार सतपाल सिंह राजू सहित सिख समाज के अनेक वरिष्ठ एवं सम्मानित सदस्य उपस्थित रहे।

गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी, साकची के प्रधान सरदार निशान सिंह ने दिवंगत जसबीर सिंह गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अत्यंत भावुक शब्दों में कहा कि दिवंगत जसबीर सिंह गांधी केवल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के कोषाध्यक्ष नहीं थे बल्कि गुरु घर की सेवा के प्रति पूर्णतः समर्पित, कर्मठ और ईमानदार सेवादार थे। उनका अचानक यूँ चले जाना हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है। एक-एक होनहार और समर्पित गुरु घर के सेवादार का इस प्रकार बिछुड़ जाना वास्तव में असहनीय है।

गुरमुख सिंह मुखे और सतबीर सिंह सोमू ने कहा कि जसबीर सिंह गांधी ने अपने कार्यकाल के दौरान गुरुद्वारा प्रबंधन, धार्मिक गतिविधियों और संगत की सेवा में जो योगदान दिया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा। गुरु साहिब उन्हें अपने चरणों में निवास बख्शें और परिवार को इस गहन दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

उल्लेखनीय है कि 8 जून को सरदार जसबीर सिंह गांधी का निधन हो गया था। वे 65 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका उपचार रायपुर में चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। अपने पीछे वे तीन बच्चों सहित एक भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं।

अपने मिलनसार, सरल और सहयोगी स्वभाव के कारण जसबीर सिंह गांधी सिख समाज में अत्यंत लोकप्रिय थे। उनके निधन का समाचार मिलते ही जमशेदपुर के सिख समाज में शोक की लहर दौड़ गई थी।

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