फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर में भारत के खेल और ओलंपिक आंदोलन को मजबूत आधार देने वाले महान उद्योगपति एवं राष्ट्रनिर्माता सर दोराबजी टाटा की 167वीं जयंती के अवसर पर टाटा स्टील ने बुधवार को विशेष प्रदर्शनी “सेलिब्रेशन ऑफ स्पोर्ट्स: सर दोराबजी टाटा की विरासत” का शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में सर दोराबजी टाटा के खेलों के विकास और भारत के ओलंपिक आंदोलन में दिए गए दूरदर्शी योगदान को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

इस सप्ताह की शुरुआत में कोलकाता में शुरू हुई यह विशेष प्रदर्शनी अब अपने अंतिम पड़ाव जमशेदपुर पहुंची है। दुर्लभ तस्वीरों, ऐतिहासिक पत्राचार, स्मृति चिह्नों और विशेष प्रस्तुतियों के माध्यम से आगंतुकों को उस समृद्ध खेल विरासत से रूबरू कराया जा रहा है, जिसने भारत की खेल यात्रा को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम की शुरुआत सर दोराबजी टाटा पार्क में पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट, कॉरपोरेट सर्विसेज डी बी सुंदरा रामम ने जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। मौके पर टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी, डॉ. टी. मुखर्जी, टाटा स्टील के वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी और अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद थे।

1920 ओलंपिक में भारत की पहली टीम को मिला था सर दोराबजी टाटा का सहयोग
भारत में संगठित खेलों के अग्रणी समर्थकों में शामिल सर दोराबजी टाटा ने देश को वैश्विक खेल मंच पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1920 में एंटवर्प ओलंपिक में भारत की पहली ओलंपिक टीम की भागीदारी सुनिश्चित करने में उनका महत्वपूर्ण सहयोग रहा। भारतीय ओलंपिक संघ के गठन में भी उनकी प्रमुख भूमिका रही और वर्ष 1927 में वे इसके पहले अध्यक्ष बने।
उनके प्रयासों ने भारत में ओलंपिक आंदोलन के लिए मजबूत संस्थागत आधार तैयार किया। वर्ष 2027 में भारतीय ओलंपिक संघ के शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि में आयोजित यह प्रदर्शनी उनके ऐतिहासिक योगदान को विशेष श्रद्धांजलि है।
बोरिया मजूमदार, डोला बनर्जी और पूर्णिमा महतो ने की खेलों पर चर्चा
कार्यक्रम के तहत “सेलिब्रेशन ऑफ स्पोर्ट्स” विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया। इसमें प्रसिद्ध खेल इतिहासकार और लेखक बोरिया मजूमदार, ओलंपियन एवं अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित तीरंदाज डोला बनर्जी तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज, पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित पूर्णिमा महतो ने हिस्सा लिया।
चर्चा के दौरान भारत में खेलों के विकास की यात्रा, सर दोराबजी टाटा के योगदान और उभरती खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए निरंतर संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
खेल प्रतिभाओं को निखारने की टाटा स्टील की परंपरा जारी
प्रदर्शनी खेलों के विकास के प्रति टाटा स्टील की दशकों पुरानी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। कंपनी लगातार जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान, उनके प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों के लिए सहयोग कार्यक्रमों में निवेश करती रही है। इन प्रयासों से अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन कर चुके हैं।
औद्योगिक विकास, परोपकार और संस्थान निर्माण के क्षेत्र में भी सर दोराबजी टाटा का योगदान आधुनिक भारत के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण रहा है। टाटा स्टील के चेयरमैन के रूप में उन्होंने चुनौतीपूर्ण दौर में कंपनी का नेतृत्व किया और कर्मचारियों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
29 अगस्त तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी
जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित यह विशेष प्रदर्शनी 29 अगस्त 2026 तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी के माध्यम से शहरवासी सर दोराबजी टाटा के जीवन, उनकी दूरदर्शिता और भारतीय खेलों की मजबूत नींव रखने में उनके ऐतिहासिक योगदान को करीब से जान सकेंगे।



































