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Jharkhand High Court : मैट्रिक के छात्र को 10 दिन अवैध हिरासत में रखा, परीक्षा छूटी, झारखंड HC ने चतरा एसपी से मांगा जवाब

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चतरा में छात्र को अवैध हिरासत में रखने पर हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाया सवाल

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस एके राय की अदालत में चतरा में मैट्रिक के छात्र को 10 दिनों तक कथित रूप से अवैध हिरासत में रखने के मामले में दाखिल याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई।सुनवाई के दौरान अदालत ने एसपी से पूछा कि संबंधित थाना ने छात्र को 10 दिनों तक हिरासत में क्यों रखा और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश क्यों नहीं किया गया?अदालत ने पूछा कि जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई? छात्र की छूटी मैट्रिक परीक्षा के लिए कौन जिम्मेदार होगा।अदालत ने अगली सुनवाई को भी एसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश देते हुए विस्तृत जवाब मांगा है।

मामले में अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी। इस दौरान अदालत ने चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल हाई कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने अदालत में केस डायरी प्रस्तुत की।सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस को आम जनता के बीच अपनी बेहतर छवि बनानी चाहिए और विश्वास कायम करना चाहिए।अदालत ने कहा कि यदि पूछताछ के बाद छात्र को छोड़ दिया जाता तो समाज में सकारात्मक संदेश जाता।

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पुलिस का काम जनता को सुरक्षा देना है, न कि उन्हें प्रताड़ित करना।बच्चे को अवैध रूप से हिरासत में रखने वाले संबंधित पुलिस अधिकारी पर त्वरित कार्रवाई होती तो, तो लोगों का भरोसा पुलिस पर बढ़ता।अदालत ने केस डायरी का अवलोकन करने के बाद पाया कि 31 जनवरी को ही छात्र का उल्लेख दर्ज है, जबकि उसके पहले या बाद में हिरासत का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।इस पर खंडपीठ ने नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान चतरा एसपी के साथ डीएसपी, लावालौंग और टंडवा थाना प्रभारी भी उपस्थित रहे।

छात्र की मां ने हेवियस कार्पस याचिका दाखिल की है। प्रार्थी का कहना है कि रंगदारी मामले में छात्र के मोबाइल को संदिग्ध बताते हुए 26 जनवरी की रात लावालौंग थाना की पुलिस उसे घर से उठा ले गई।

पूछताछ के बाद भी उसे नहीं छोड़ा गया और बाद में टंडवा थाना को सौंप दिया गया। आरोप है कि छात्र को 10 दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया।याचिका दाखिल होने के बाद छात्र को घर भेज दिया गया, लेकिन परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मी अब भी घर के आसपास तैनात हैं और केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।प्रार्थी ने अदालत को बताया कि कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं किया गया।

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