देर शाम सजने लगी दुकानें, उधर, सब्जी विक्रेता सामान छोड़कर भागे
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
टाटानगर स्टेशन के विस्तारीकरण को लेकर स्टेशन-बागबेड़ा मुख्य सड़क से वर्षों पुराने लीज होल्डरों की दुकानों पर वृहद पैमाने पर रेल प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर जमीन को अपने कब्जे में लिया था। सभी दुकानदारों की लीज नवीनीकरण निरस्त कर दी गई थी। उस बड़े भूखंड पर पीछले कुछ महीने से खुलेआम रेल और जिला प्रशासन की नाक के नीचे अतिक्रमण फल फूल गया था। दुर्गापूजा के बाद रविवार दिन में उन दुकानदारों पर आरपीएफ ने बड़ी कार्रवाई की और रेलवे जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया। आरपीएफ की इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया। जहां आरपीएफ ने लगभग 13 लोगों को हिरासत में भी लिया, जिनमें मुकेश होटल, सिपाही चाय वाला और कुछ दुकानदार और उनके स्टॉफ शामिल हैं। हालांकि शाम होते होते सभी पकड़े गए लोगों से दो-दो हजार का जुर्माना 144 रेल अधिनियम के तहत वसूला और सभी को छोड़ दिया गया।

वहीं देर शाम होते होते कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकान खोल ली, जो 10 बजते ही स्थानीय पुलिस के सायरन के बाद पर्दे के पीछे संचालित होने लगी आम दिनों की तरह? उधर, शाम को स्टेशन मुख्य सड़क पर भी सब्जी विक्रेताओं पर आरपीएफ का डंडा चला, जिससे वहां भगदड़ मच गई। सब्जी विक्रेता अपना सामान छोड़कर बचने के लिए भाग खड़े हुए। उनका कहना है कि वह हर दूसरे दिन दो-दो हजार का केस आरपीएफ को कैसे दें? जबकि उनकी एक दिन की आय भी उतनी नहीं है।
बताया जाता है कि सोमवार को स्टेशन से जयपुर के लिए खाटीपुरा ट्रेन का उदघाटन होना है, जिसे लेकर यह अभियान चलाया गया। इधर, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सबसे बड़ा सवाल यह है कि बार बार स्टेशन में रेल और जिला प्रशासन की नाक के नीचे अतिक्रमण का खेल फल फूल रहा है। जब स्टेशन विस्तारीकरण को लेकर अतिक्रमण हटाया गया था, तो इंजीनियरिंग विभाग ने उस क्षेत्र को अपने कब्जे में क्यों नहीं किया। स्टेशन चाईबासा स्टैंड से भगाये गए कुछ दुकानदार उधर बागबेड़ा रोड पर बस गए हैं। यह अतिक्रमण का खेल किसके इशारे पर चल रहा है। जब कोई अधिकारी डीआरएम या उनसे ऊपर आते हैं तो उन्हें हटाया जाता है और फिर उनके जाते ही अतिक्रमण का खेल विभाग की मिलीभगत से होना शुरू हो जाता है।
स्टेशन में अतिक्रमण के खेल में चर्चा है कि जिन पुराने लीज वालों को हटाया गया वह इन दुकानदारों से भी मोटी रकम जगह के नाम पर ले रहे हैं। अगर ये दुकानदार उन्हें किराया जमीन के लिए दे रहे हैं तो आईओडब्ल्यू कहाँ है? वैसे यह जानकर विभाग भी सन्न है। खैर, इन दुकानदारों का स्टेशन में अब कोई नेता भी नहीं दिख रहा जो इनकी आवाज को बुलंद कर सके। सभी पुराने नेता अपनी अपनी कमाई में व्यस्त हैं। ये दुकानदार पर्व त्यौहारों में स्टेशन पर रौनक बनाते हैं, लेकिन विभागीय कार्रवाई के वक्त अकेले पढ़ जाते हैं।
वैसे स्टेशन के बाहर दुकानें नहीं लगने से यात्रियों को भी खाने के लाले पढ़ जाते हैं। बहरहाल, यह अभियान क्या नया रंग लाता है या फिर शाम के स्टेशन कार्यक्रम के बाद फिर स्थिति जस की तस होने वाली है यह देखने वाली बात होगी। वैसे अतिक्रमण हटने से राहगीर खुश भी हैं क्यूंकि इससे रोड़ तक वाहनों की पार्किंग होने से आम लोगों को काफी परेशानी भी झेलनी पड़ती है।
टीओपी के पीछे गली का बुरा हाल
स्टेशन टीओपी के पीछे बंद हुई सड़क का इन दिनों बुरा हाल है। रेलवे के खाली क्वार्टरों पर दुकानदारों ने कब्जा कर लिया है। बॉउंड्री तोड़ तोड़ कर दुकानें सजा ली हैं। पूर्व में जब सड़क चालू थी तो आवागमन में दिक्क़त होती थी, चूंकि अब सड़क बंद हो गई है तो रेलवे की संपत्ति का खुलकर दुरूपयोग किया जा रहा है। इंजीनियरिंग विभाग की चुप्पी बहुत कुछ इशारा करती है।
जुगसलाई की लीज भी निरस्त, हाईकोर्ट गए
इधर, सूत्र बताते हैं कि जुगसलाई प्रदीप मिश्रा चौक के पास भी रेलवे की लीज जमीन का एग्रीमेंट रद्द हो चुका है। दुकानदार हाईकोर्ट की शरण में गए हैं। यहां के साथ विभिन्न आधा दर्जन शराब दुकानों को बंद करने का भी आदेश है, उसके बावजूद इंजीनियरिंग विभाग क्या खेला कर रहा है, यह सब उच्च स्तरीय जांच का विषय है। लोको मोड़ के पास भी लीज एग्रीमेंट से अधिक भूखंड की घेराबंदी कर कमर्शियल उपयोग हो रहा है, वहां भी विभाग की आंखें बंद हैं।


































