Dhanbad : सिंदरी में बार-बार टूट रही जलापूर्ति पाइपलाइन, आखिर कब तय होगी जिम्मेदारी?

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बाहरी एजेंसियों की लापरवाही से जनता प्यासी, नुकसान कोई करता है और मरम्मत किसी और के भरोसे

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

सिंदरी। सिंदरी में जलापूर्ति पाइपलाइन को बार-बार नुकसान पहुंचने की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि सड़क निर्माण या अन्य विकास कार्यों के दौरान बाहरी एजेंसियों की लापरवाही का सीधा खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ता है। हर बार पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होती है, जलापूर्ति ठप हो जाती है और हजारों परिवारों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि एसीसी (ACC) या सेल (SAIL) जैसी एजेंसियों के कार्यों के दौरान कई बार पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है। विडंबना यह है कि नुकसान कोई और करता है, मरम्मत का जिम्मा एचयूआरएल (HURL) या एफसीआईएल (FCIL) को उठाना पड़ता है, जबकि सबसे अधिक परेशानी आम जनता झेलती है।

यह सवाल अब गंभीर हो गया है कि आखिर हर बार जनता ही क्यों परेशान हो? क्या विकास कार्य शुरू करने से पहले संबंधित एजेंसियां भूमिगत पाइपलाइन और अन्य सार्वजनिक उपयोगिताओं का सर्वेक्षण नहीं करतीं? यदि करती हैं, तो फिर बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी ठेकेदार या एजेंसी की लापरवाही से सरकारी संपत्ति अथवा सार्वजनिक उपयोगिता, जैसे जलापूर्ति पाइपलाइन, को नुकसान पहुंचता है तो अनुबंध की शर्तों, विभागीय नियमों और लागू कानूनों के तहत संबंधित एजेंसी पर जुर्माना, क्षतिपूर्ति और अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, वास्तविक कार्रवाई संबंधित विभाग और मामले के तथ्यों पर निर्भर करती है।

सिंदरी की जनता अब प्रशासन से मांग कर रही है कि ऐसी घटनाओं में जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाए। यदि किसी की लापरवाही से जलापूर्ति बाधित होती है, तो केवल पाइपलाइन की मरम्मत ही नहीं, बल्कि दोषी एजेंसी पर आर्थिक दंड और क्षतिपूर्ति भी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। जनता का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो विकास कार्यों के नाम पर लोगों को बार-बार पानी के संकट से जूझना पड़ता रहेगा।

फतेह लाइव सवाल उठाता है?

क्या सिंदरी में विकास कार्यों के दौरान होने वाली हर पाइपलाइन क्षति की जवाबदेही तय होगी, या हर बार जनता ही इसकी कीमत चुकाती रहेगी?

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