रेलवे राजस्व की सालों से चल रही चोरी पर दक्षिण पूर्व रेलवे का विजिलेंस विभाग कुंभकरणी नींद में सोया
इस मामले की विजिलेंस अथवा विभागीय जांच की प्रक्रिया को शुरू नहीं किया जाना बड़े गोलमाल का संकेत
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
चक्रधरपुर रेल मंडल का सबसे प्रमुख स्टेशन ‘टाटानगर’ इन दिनों यात्रियों की सुरक्षा और नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे एक बड़े पार्सल सिंडिकेट के कारण सुर्खियों में है. हाल ही में अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस में क्षमता से 50% अधिक (लगभग 2 टन) माल लोड किए जाने के भंडाफोड़ ने रेलवे के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है. इस पूरे महाघोटाले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली ट्रेनों में यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाले इस खेल पर सीनियर डीसीएम (Sr. DCM) और मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक (CPS) की जोड़ी पर ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
कथित तौर पर पिछले दरवाजे से पोस्टिंग पाने वाले सीपीएस ‘ अमित चौधरी’ को सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी का ऐसा वरदहस्त प्राप्त है कि मीडिया स्टिंग में सच उजागर होने के बाद भी रेल प्रशासन केवल मामूली जुर्माना लगाकर इस बड़े सिंडिकेट को अभयदान देने की तैयारी में है. हद तो यह है कि रेलवे का विजिलेंस विभाग भी इस पूरे मामले में गहरी नींद सोया हुआ है और ‘सब ठीक है’ की बंसी बजा रहा है. अब इस मामले की विजिलेंस अथवा विभागीय जांच की प्रक्रिया को शुरू नहीं किया जाना बड़े गोलमाल की ओर ही इशारा कर रहा है. इस मामले में सीनियर डीसीएम का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनसे संपर्क नहीं हो सका.
स्टिंग में खुलासा : 11 जून को क्या हुआ था?
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत बीते 11 जून को हुई, जब अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंची. खबर है कि एक मीडिया स्टिंग के दौरान इस बड़े खेल का लाइव भंडाफोड़ हुआ. नियमों के मुताबिक ट्रेन के पार्सल वैन (VPH) की क्षमता जितनी तय थी, उससे करीब 50% अधिक यानी लगभग 2 टन अतिरिक्त माल अवैध रूप से लोड किया गया था. इस ओवरलोडिंग के कारण 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली इस हाई-स्पीड ट्रेन के पलटने या किसी बड़े हादसे का शिकार होने का खतरा बना हुआ था?
ऐसे काम करता है टाटानगर का पार्सल सिंडिकेट
सूत्रों के मुताबिक, टाटानगर स्टेशन को इस सिंडिकेट का मुख्य ट्रांजिट हब बनाया गया है. बाहर से कुछ प्रीमियत ट्रेनों में आने वाले अवैध और ओवरलोडेड पार्सल को टाटानगर में उतार लिया जाता है. यहां से उसे स्थानीय कर्मचारियों की मिलीभगत से दूसरी ट्रेन से हावड़ा अथवा पुरी तक भेज दिया जाता है. इस तरह रेलवे राजस्व की सालों से बड़े स्तर पर चोरी का खेल चल रहा है. दिलचस्प है इस मामले में अब तक दक्षिण पूर्व रेलवे का विजिलेंस विभाग कुंभकरणी नींद में सोया हुआ है.
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मुख्य ट्रांजिट हब बना टाटानगर: सूत्रों के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट ने टाटानगर स्टेशन को अपना मुख्य ट्रांजिट हब (अड्डा) बना लिया है, जहां से अवैध खेल को आसानी से अंजाम दिया जाता है.
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प्रीमियम ट्रेनों से ओवरलोडिंग का खेल: बाहर से आने वाली कई प्रीमियम ट्रेनों में क्षमता से अधिक और अवैध पार्सल लोड किया जाता है, जिसे बेहद चालाकी से टाटानगर स्टेशन पर ही उतार लिया जाता है.
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स्थानीय रेल कर्मचारियों की मिलीभगत: टाटानगर में माल उतरने के बाद स्थानीय रेल कर्मचारियों और सिंडिकेट की सांठगांठ शुरू होती है. उनकी मदद से इस अवैध पार्सल को बिना किसी जांच के दूसरी ट्रेनों में शिफ्ट कर दिया जाता है.
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नजदीकी बड़े स्टेशनों पर सप्लाई: टाटानगर से री-लोड होने के बाद इस अवैध और ओवरलोडेड माल को पास के अन्य बड़े और प्रमुख स्टेशनों पर भेज दिया जाता है.
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सालों से रेलवे राजस्व की बड़ी चोरी: पार्सल के वजन और भाड़े में हेराफेरी का यह खेल कोई नया नहीं है। इस सिंडिकेट के जरिए सालों से रेलवे के सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व (Revenue) का चूना लगाया जा रहा है.
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कुंभकर्णी नींद में सोया विजिलेंस विभाग: इतने बड़े स्तर पर चल रहे इस सिंडिकेट और राजस्व चोरी के बावजूद, ‘दक्षिण पूर्व रेलवे’ (SER) का विजिलेंस विभाग पूरी तरह से बेखबर और कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.




