साक्ष्य के अभाव में अदालत ने अशोक कुमार सिंह और मदन मोहन शर्मा को किया बरी
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर न्यायलय से प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी शिल्पा मुर्मू की अदालत ने धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के एक मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए मेसर्स मारुति इंटरप्राइजेज के दो पार्टनर अशोक कुमार सिंह और मदन मोहन शर्मा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
मामले में मारुति इंटरप्राइजेज के पार्टनर रहे अरविंद कुमार की पत्नी सुनीता देवी ने शिकायतवाद दायर कर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। शिकायत में बताया गया था कि वर्ष 1998 में मेसर्स मारुति इंटरप्राइजेज में चार पार्टनर थे। इनमें उनके पति अरविंद कुमार, अशोक कुमार सिंह, मदन मोहन शर्मा और दिलीप लहरी शामिल थे। कंपनी टाटा पावर, जोजोबेड़ा में काम करती थी।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2015 में अरविंद कुमार की मृत्यु के बाद सुनीता देवी को कंपनी में पार्टनर बनाया गया था। उनका आरोप था कि कंपनी के मुनाफे में निर्धारित एक-चौथाई हिस्सेदारी उन्हें नहीं दी गई। राशि की मांग करने पर अन्य पार्टनरों द्वारा कंपनी बंद कर दिए जाने का आरोप लगाया गया था। शिकायत में यह भी कहा गया था कि कंपनी की गाड़ियों का परिचालन अब भी किया जा रहा है।
सुनीता देवी की शिकायत पर अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लिया था। मामले की सुनवाई के दौरान तीन लोगों की गवाही हुई। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं मानते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता लूणी कच्छप, लखन चौधरी और सौरभ सिन्हा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।




































