मंदिर प्रबंधन की ओर से मंदिर बंद रखने का आदेश जारी होने की बात, चाबी नहीं मिलने पर श्रद्धालुओं ने बाहर ही किया डेढ़ घंटे तक कीर्तन
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर में जुगसलाई के गर्ल्स स्कूल रोड स्थित राणी सती मंदिर में शनिवार को उस समय स्थिति चर्चा का विषय बन गई, जब पिछले करीब 30 वर्षों से हर शनिवार होने वाले नियमित भजन-कीर्तन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को मंदिर बंद मिला। श्रद्धालुओं के अनुसार मंदिर के अंदर ताला लगा था और चाबी उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्धारित समय पर मंदिर परिसर के भीतर कार्यक्रम नहीं हो सका।
श्रद्धालुओं और समिति से जुड़े लोगों के अनुसार हर शनिवार रात करीब 8 बजे से 9:30 बजे तक मंदिर में भजन-कीर्तन का आयोजन होता रहा है। उनका कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों से स्थानीय श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक रूप से निभाई जा रही धार्मिक परंपरा है।
चाबी नहीं मिली तो बाहर शुरू हुआ कीर्तन
शनिवार, 3 अक्टूबर को श्रद्धालु निर्धारित समय पर मंदिर पहुंचे, लेकिन मंदिर बंद होने के कारण उन्हें बाहर ही रुकना पड़ा। समिति से जुड़े लोगों का आरोप है कि मंदिर की देखरेख करने वाले जुगसलाई निवासी महेश खिरवाल की ओर से इस दिन मंदिर की चाबी उपलब्ध नहीं कराई गई।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर के बाहर स्थित चबूतरे पर ही भजन-कीर्तन शुरू कर दिया। महिला और पुरुष श्रद्धालु ढोलक-मंजीरे के साथ करीब डेढ़ घंटे तक भजन गाते रहे। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर का दरवाजा बंद होने के बावजूद उनकी धार्मिक आस्था और 30 वर्षों से चली आ रही परंपरा नहीं रुकी।
मंदिर बंद रखने का आदेश जारी होने की बात
समिति से जुड़े लोगों ने बताया कि मंदिर प्रबंधन की ओर से मंदिर बंद रखने का आदेश जारी किए जाने की बात सामने आई है। इसी कारण शनिवार को मंदिर में नियमित भजन-कीर्तन नहीं हो सका। हालांकि, मंदिर प्रबंधन की ओर से इस संबंध में क्या कारण बताया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि वे किसी प्रकार का विवाद नहीं चाहते। उनका उद्देश्य केवल वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखना है।
श्रद्धालुओं ने कहा—परंपरा टूटने नहीं देंगे
समिति के सदस्यों ने कहा कि करीब तीन दशक से प्रत्येक शनिवार होने वाला भजन-कीर्तन स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। उनका कहना है कि मंदिर के भीतर कार्यक्रम नहीं हो सका तो उन्होंने बाहर बैठकर भजन किया, लेकिन परंपरा को टूटने नहीं दिया।

समिति ने मंदिर प्रबंधन और समाज के सभी लोगों से आपसी सम्मान और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की मांग की है, ताकि वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा आगे भी जारी रह सके।




































