साइबर अपराधियों को पैसे लेकर उपलब्ध कराते थे अवैध सिम कार्ड, ग्राहकों के नाम पर धोखे से कराते थे एक से अधिक बार KYC
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर में साइबर अपराधियों को फर्जी तरीके से सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक गिरोह का जमशेदपुर पुलिस ने खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में POS एजेंट रौनक कुमार, सन्नी कुमार साव और जियो कंपनी का कर्मचारी प्रकाश कुमार शामिल हैं। इन तीनों पर साइबर अपराधियों के साथ मिलीभगत कर अवैध तरीके से सिम कार्ड जारी करने, उन्हें एक्टिवेट करने और अपराधियों तक पहुंचाने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, दूरसंचार विभाग की ओर से भेजे गए एक पत्र के माध्यम से पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक को कुछ POS एजेंटों की साइबर अपराधियों के साथ संदिग्ध गतिविधियों और मिलीभगत की खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि POS एजेंटों और जियो कंपनी के कर्मचारी की मिलीभगत से बड़ी संख्या में ऐसे सिम कार्ड जारी और एक्टिवेट किए गए थे, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों को अंजाम देने में किया जा रहा था। इन सिम कार्डों से जुड़ी शिकायतें चक्षु पोर्टल (CHAKSHU Portal) और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP Portal) पर भी दर्ज थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में जमशेदपुर साइबर अपराध थाना में कांड संख्या 109/2026 दर्ज किया गया है। प्राथमिकी 1 नवंबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2008 और दूरसंचार अधिनियम 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
ऐसे लोगों को बनाते थे निशाना
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर अवैध रूप से सिम कार्ड जारी करते थे। इसके लिए वे सीधे-सादे और कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाते थे। ग्राहकों को सिम कार्ड उपलब्ध कराने के दौरान धोखे से उनकी दो या उससे अधिक बार KYC प्रक्रिया पूरी कर ली जाती थी। ग्राहक को जानकारी दिए बिना उसके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी कर दिए जाते थे।
ग्राहक को इनमें से केवल एक सिम कार्ड दिया जाता था, जबकि उसी के नाम पर जारी अन्य सिम कार्ड साइबर अपराधियों को पैसों के बदले उपलब्ध करा दिए जाते थे। इस तरह ग्राहकों की पहचान का दुरुपयोग कर अपराधियों के लिए फर्जी तरीके से मोबाइल कनेक्शन की व्यवस्था की जाती थी।
देशभर में साइबर ठगी में हो रहा था इस्तेमाल
पुलिस के मुताबिक, इन अवैध सिम कार्डों का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में वित्तीय धोखाधड़ी, बैंक फ्रॉड और अन्य गंभीर साइबर अपराधों को अंजाम देने में किया जा रहा था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों के नाम पर बिना जानकारी के अतिरिक्त सिम कार्ड जारी किए और कितने सिम कार्ड साइबर अपराधियों तक पहुंचाए।
आरोपियों पर इन धाराओं में मामला दर्ज
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(3), 319(2), 338, 336(3), 111(3), 111(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा आईटी एक्ट 2008 की धारा 66(C) और 66(D) तथा दूरसंचार अधिनियम 2023 की धारा 42(3)(E) भी लगाई गई है।
पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, अवैध सिम कार्डों की संख्या और साइबर अपराध में उनके इस्तेमाल से संबंधित और जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।


































