किराये के गोदामों में पटाखों का भंडारण, कपड़े और सजावटी लाइट की आड़ में कारोबार का आरोप
उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना पर प्रशासन की चुप्पी से उठे सवाल
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर में जुगसलाई जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में पटाखों का अवैध कारोबार एक बार फिर फलने-फूलने लगा है। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही क्षेत्र में किराये के गोदामों में बड़ी मात्रा में पटाखों का भंडारण किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ गैर लाइसेंसी कारोबारी कपड़ों और सजावटी लाइट के कारोबार की आड़ में पटाखों की खरीद-बिक्री और भंडारण कर रहे हैं। ऐसे में उच्च न्यायालय के सख्त आदेशों और जिला प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जुगसलाई और बागबेड़ा क्षेत्र में हर साल दीपावली के आसपास अस्थायी गोदाम लेकर पटाखों का भंडारण किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस बार भी जुगसलाई के बाजार और बस्ती क्षेत्रों में पटाखों का अवैध कारोबार होने का आरोप लगाया जा रहा है। घनी आबादी के बीच इस तरह का कारोबार स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
आगजनी की स्थिति में दमकल पहुंचना भी चुनौती
जुगसलाई क्षेत्र की संकरी गलियां और घनी आबादी आगजनी जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में बड़ी चुनौती बन सकती हैं। यदि किसी गोदाम या दुकान में आग लगने की घटना होती है, तो दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है।
इन्हीं संभावित खतरों को देखते हुए न्यायालय के सख्त आदेश के बाद जुगसलाई क्षेत्र में पटाखों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाए जाने की बात कही जाती रही है। इसके बावजूद त्योहार के समय कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर कारोबार किए जाने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।
कपड़े और सजावटी लाइट की आड़ में कारोबार का आरोप
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कुछ कारोबारी कपड़ों और सजावटी लाइट की दुकानों की आड़ में पटाखों का कारोबार कर रहे हैं। वहीं, किराये के गोदामों में बड़ी मात्रा में पटाखे जमा किए जाने की भी शिकायतें हैं।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह न केवल सुरक्षा नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में किसी बड़ी दुर्घटना को भी आमंत्रण दे सकता है।
प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
एक ओर जिला प्रशासन की ओर से अवैध पटाखा कारोबार पर सख्त कार्रवाई की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर बाजार और बस्ती क्षेत्रों में कथित तौर पर पटाखों का भंडारण और खरीद-बिक्री जारी रहने के आरोप प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब जुगसलाई क्षेत्र में पटाखों के कारोबार पर रोक है, तो आखिर किराये के गोदामों में पटाखों का भंडारण कैसे हो रहा है? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर कार्रवाई का इंतजार किसी बड़ी दुर्घटना के बाद किया जाएगा?
समय रहते कार्रवाई की जरूरत
घनी आबादी वाले जुगसलाई क्षेत्र में पटाखों के अवैध भंडारण और कारोबार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन को तत्काल जांच करानी चाहिए। संदिग्ध गोदामों और दुकानों की जांच, अवैध पटाखों की जब्ती तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
दीपावली खुशियों का त्योहार है, लेकिन सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी समय बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल कार्रवाई की घोषणा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीन पर प्रभावी निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।


































