भ्रष्टाचार, अनियमितता और चुनाव नहीं कराने की शिकायत पर झारखंड हाईकोर्ट का निर्देश
रजिस्ट्रेशन महानिरीक्षक को सभी पक्षों को सुनने के बाद कानून के अनुसार निर्णय लेने को कहा
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर के डॉ. श्रीकृष्ण सिन्हा संस्थान से जुड़े विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। संस्थान में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और चुनाव नहीं कराए जाने को लेकर दायर शिकायत पर अदालत ने झारखंड के रजिस्ट्रेशन महानिरीक्षक को तीन महीने के भीतर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने 28 अक्टूबर 2026 को डब्ल्यूपी (सी) संख्या 8154/2026 की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता संजय कुमार, रमन कुमार और रविंद्र कुमार ने संस्थान के महासचिव डॉ. हरिबल्लभ सिंह ‘आरसी’ के खिलाफ कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और संस्थान का चुनाव नहीं कराने के संबंध में 11 फरवरी 2026 को रजिस्ट्रेशन महानिरीक्षक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद रजिस्ट्रेशन महानिरीक्षक के कार्यालय ने 9 अप्रैल 2026 को कोल्हान प्रमंडल के निबंधन कार्यालय निरीक्षक से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद 10 अप्रैल को याचिकाकर्ता संजय कुमार को साक्ष्य के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया। संजय कुमार ने संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य भी प्रस्तुत किए, लेकिन इसके बाद शिकायत पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि शिकायत अभी प्रारंभिक जांच के स्तर पर है। यदि मामला सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 और बिहार (अब झारखंड) सोसाइटी रजिस्ट्रेशन रूल्स, 1965 के तहत निर्णय के दायरे में आता है, तो कानून के अनुसार उचित फैसला लिया जाएगा।
मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रेशन महानिरीक्षक को निर्देश दिया कि शिकायत पर याचिकाकर्ताओं अथवा उनके प्रतिनिधियों तथा संस्थान और उसके महासचिव को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए। इसके बाद आदेश की प्रति प्राप्त होने या प्रस्तुत किए जाने की तिथि से तीन महीने के भीतर कानून के अनुसार उचित निर्णय लिया जाए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता या शिकायत की वैधानिक स्वीकार्यता पर अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की है। इन दोनों पहलुओं पर अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकारी को सभी पक्षों को सुनने के बाद लेना होगा। इसी निर्देश के साथ अदालत ने याचिका का निष्पादन कर दिया।


































