थाना प्रभारी समेत 15 पुलिसकर्मियों के निलंबन और SIT जांच का दिया हवाला, कहा- महिला सुरक्षा पर राजनीति नहीं, न्याय जरूरी
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
सरायकेला जिला के गम्हरिया थाना परिसर में महिला के साथ कथित दुष्कर्म के मामले को लेकर भाजपा द्वारा हेमंत सोरेन सरकार पर किए जा रहे हमलों के बीच झामुमो युवा नेता सन्नी सिंह ने पलटवार किया है। उन्होंने घटना को बेहद गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताते हुए कहा कि महिला के साथ किसी भी स्तर पर गलत व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी द्वारा की गई कार्रवाई पर संतोष जताया।
सन्नी सिंह ने कहा कि गम्हरिया प्रकरण में पुलिसकर्मी पर गंभीर आरोप सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले को दबाने के बजाय अपने ही विभाग के खिलाफ कार्रवाई की। थाना प्रभारी समेत कुल 15 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और विशेष जांच दल (SIT) मामले की जांच कर रहा है।
उन्होंने कहा कि अब आपराधिक आरोपों की निष्पक्ष जांच पूरी कर साक्ष्य न्यायालय के सामने रखे जाने चाहिए। इसके बाद न्यायालय को अपना काम करने देना चाहिए।
सन्नी सिंह ने भाजपा से सवाल किया कि यदि घटना के बाद आरोपी की गिरफ्तारी, थाना प्रभारी समेत 15 पुलिसकर्मियों का निलंबन और SIT जांच भी पर्याप्त कार्रवाई नहीं है, तो भाजपा बताए कि एक जिला पुलिस अधीक्षक तत्काल इससे अधिक और क्या कर सकता था?
दूसरे राज्यों के मामलों का दिया हवाला
सन्नी सिंह ने कहा कि महिला सुरक्षा के सवाल पर किसी सरकार को छूट नहीं मिल सकती। लेकिन किसी एक आपराधिक घटना को केवल हेमंत सोरेन सरकार के राजनीतिक चरित्र से जोड़ने से पहले भाजपा को उन राज्यों की घटनाओं को भी याद करना चाहिए, जहां उसके शासन के दौरान पुलिसकर्मियों पर थाने, लॉकअप अथवा पुलिस आवास से जुड़े यौन अपराध के गंभीर आरोप लगे।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के ललितपुर में वर्ष 2022 के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के दौरान पाली थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी पर एक नाबालिग से थाने के भीतर दुष्कर्म का आरोप लगा था। आरोपी थाना प्रभारी को गिरफ्तार किया गया था और थाने के पूरे स्टाफ को पुलिस लाइन भेजने जैसी व्यापक कार्रवाई हुई थी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले का संज्ञान लिया था।
सन्नी सिंह ने सवाल किया कि क्या उस घटना के आधार पर यह कहा गया कि उत्तर प्रदेश की पूरी सरकार अपराध में शामिल थी? यदि नहीं, तो झारखंड में किसी पुलिसकर्मी के कथित अपराध के बाद सरकार द्वारा कार्रवाई किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से कटघरे में खड़ा करने का पैमाना अलग क्यों है?
उन्होंने मध्य प्रदेश के रीवा में वर्ष 2020 के मामले का भी जिक्र किया। उस समय शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा सरकार थी। एक महिला ने लॉकअप में पुलिस अधिकारियों पर सामूहिक दुष्कर्म के गंभीर आरोप लगाए थे। NHRC ने मामले का संज्ञान लेकर राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और जेल महानिदेशक को नोटिस जारी किया था।
सन्नी सिंह ने गुजरात के संतरामपुर से जुड़े वर्ष 2018 के मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें थाने में महिला से दुष्कर्म का आरोप सामने आया था। उस समय गुजरात में विजय रूपाणी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी। मामला बाद में गुजरात हाईकोर्ट तक पहुंचा।
असम और हरियाणा के मामलों पर भी उठाए सवाल
झामुमो नेता ने असम के हाजो में वर्ष 2018 के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस से जुड़े एक अधिकारी पर पुलिस क्वार्टर में महिला से दुष्कर्म का आरोप लगा था। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उस समय असम में भाजपा के सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री थे।
इसी तरह हरियाणा के करनाल में वर्ष 2022 में एक महिला ने होमगार्ड पर पुलिस आवास में दुष्कर्म का आरोप लगाया था। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उस समय हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी।
सन्नी सिंह ने सवाल किया कि इन मामलों में आरोपी के अपराध को संबंधित मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत अपराध नहीं माना गया, तो झारखंड में अलग राजनीतिक पैमाना क्यों अपनाया जा रहा है?
राजस्थान और महाराष्ट्र के मामलों का भी उल्लेख
सन्नी सिंह ने राजस्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि चूरू के सरदारशहर से जुड़े वर्ष 2017 के कथित मामले में महिला कांस्टेबल ने तत्कालीन थाना प्रभारी समेत पुलिसकर्मियों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। मामले में प्राथमिकी वर्ष 2026 में दर्ज हुई, जबकि कथित घटना के समय राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी।
उन्होंने जयपुर के वर्ष 2025 के मामले का भी जिक्र किया, जिसमें पुलिस कांस्टेबल पर एक महिला से होटल में दुष्कर्म का आरोप लगा था। आरोपी को गिरफ्तार और निलंबित किया गया था।
इसी तरह महाराष्ट्र के पालघर में वर्ष 2025 में एक कांस्टेबल पर पुलिस क्वार्टर में महिला से दुष्कर्म का आरोप लगा था। आरोपी की गिरफ्तारी हुई और थाना प्रभारी का तबादला किया गया। उस समय महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार थी।
सन्नी सिंह ने कहा कि इन उदाहरणों का उद्देश्य किसी राज्य सरकार को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह बताना है कि पुलिस तंत्र के भीतर किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप सामने आना केवल एक राज्य, एक राजनीतिक दल या पूरे पुलिस महकमे तक सीमित समस्या नहीं है।
उन्होंने सहारनपुर के वर्ष 2015 के मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें थाना परिसर में सामूहिक दुष्कर्म का आरोप सामने आया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय उत्तर प्रदेश में भाजपा नहीं, बल्कि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार थी।
सन्नी सिंह ने कहा, “हम भाजपा से सवाल जरूर पूछ रहे हैं, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर नहीं। महिला सुरक्षा राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं हो सकती।”
उन्नाव प्रकरण का भी उठाया सवाल
सन्नी सिंह ने चर्चित उन्नाव रेपकांड में भाजपा सांसद कुलदीप सेंगर का नाम आने का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि क्या इससे पूरे भाजपा संगठन को दोषी मान लिया जाए?
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति पर गंभीर आपराधिक आरोप सामने आने पर उसकी निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। किसी एक आरोपी के कथित अपराध को पूरे राजनीतिक दल या सरकार का व्यक्तिगत अपराध बताना उचित नहीं है।
पुलिस नेतृत्व की कसौटी कार्रवाई से तय होनी चाहिए
सन्नी सिंह ने कहा कि गम्हरिया की घटना ने पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाया है और कथित अपराध की निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए। दोषी साबित होने वाले व्यक्ति को कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि गम्हरिया में घटना सामने आने के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी हुई, थाना प्रभारी समेत 15 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और SIT गठित की गई। पुलिस अधीक्षक स्वयं पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि कार्रवाई नहीं होने की बात किस आधार पर कही जा रही है?
सन्नी सिंह ने कहा, “जब एक एसपी अपने ही थाना प्रभारी समेत 15 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करता है, तो उसका संदेश भी समझना होगा। गलत करने वाले पुलिसकर्मी का बचाव पुलिस का मनोबल नहीं बढ़ाता। अपने ही विभाग में गलत करने वालों पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों का मनोबल बढ़ना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार से सवाल करे और झामुमो भी जवाब देगा, लेकिन पीड़िता को न्याय दिलाने के प्रश्न को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में नहीं बदलना चाहिए। सन्नी सिंह ने कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच हो, दोषी को सजा मिले और पुलिस व्यवस्था की खामियां सुधारी जाएं। इसके बाद न्यायालय को अपना काम करने दिया जाए। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा पर राजनीति से ज्यादा जरूरी न्याय है।


































