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Jamshedpur : हिंदुओं से रोटी बेटी का संबंध : कुलविंदर, संदीप दायमा को पार्टी से बाहर करे बीजेपी, लालपुरा और सिरसा पर सवाल

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फतेह लाइव, रिपोर्टर।

राष्ट्रीय सनातन सिख सभा के संयोजक अधिवक्ता कुलविंदर सिंह ने कहा कि हिंदुओं के साथ सिखों का रोटी बेटी का संबंध है। मजबूत सामाजिक सांस्कृतिक धार्मिक संबंध है और इसे नाखून और मांस की तरह अलग-अलग नहीं किया जा सकता।

कुलविंदर सिंह ने राजस्थान के तिजारा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा नेता संदीप दायमा के बयान की कड़ी निंदा की है जिसमें उसने कहा कि गुरुद्वारा नासूर है और इसे उखाड़ फेंका जाना चाहिए।
कुलविंदर सिंह के अनुसार सिखों का और गुरुद्वारों का इतिहास संदीप दायमा जैसे नेताओं को बीजेपी और आरएसएस अच्छी तरह से पढ़ाने का काम करें। ऐसे सिर फिरे नेताओं की किसी भी राजनीतिक दल में जगह नहीं होनी चाहिए।

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अधिवक्ता ने इसे भी शर्मनाक बताया कि जिस मंच का वह प्रयोग कर रहा था, उस मंच पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं पूर्व सांसद तथा प्रत्याशी बाबा बालक नाथ विराजमान थे और उन्होंने भी उसे नहीं रोका।

इस अधिवक्ता के अनुसार जिन्होंने भी गुरुद्वारों पर बुरी नजर डाली उनका हश्र क्या हुआ है, यह सबक ले लिया जाना चाहिए।
मुगलों से लड़ाई हो या देश की आजादी की लड़ाई या आपातकाल के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन, इसमें गुरुद्वारा ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की है।

1922 के ऑल इंडिया गुरुद्वारा एक्ट का हवाला देते हुए अधिवक्ता ने कहा कि उस समय महात्मा गांधी, नेहरू, पटेल आदि नेताओं ने कहा था कि जिस तरह से इन्होंने अंग्रेजों से लड़कर कानून बनवाया है, आज़ादी की पहली लड़ाई जीती है, इस तरह सिख इस पूरे भारत को एक गुरुद्वारा समझे और इसकी आजादी की भी लड़ाई लड़ें।

हर सिख के लिए यह भारतवर्ष एक जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि पवित्र गुरुद्वारा है और उसकी रक्षा के लिए हर प्रकार की कुर्बानी देने को तैयार रहता है।

करतारपुर गलियारा, गुरु तेग बहादुर की जयंती, गुरु गोविंद सिंह जी का 350 वां प्रकाश पर्व, साहिबजादों के बलिदान का राष्ट्रीय बाल दिवस जैसे सराहनीय कार्य कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिखों के दिल में जगह बनाई है, उसे भाजपा के संदीप दायमा जैसे नेताओं ने चोट पहुंचाया है।

वहीं अधिवक्ता ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सरदार इकबाल सिंह लालपुरा एवं भाजपा के सिख नेता मनजिंदर सिरसा पर सवाल उठाया है कि अब उन्होंने खामोशी की चादर क्यों ओढ़ रखी है। यदि चुप रहे तो यह समझा जाएगा कि कांग्रेस के खिलाफ बोलना विशुद्ध राजनीति है और वे पंथ के सच्चे हितैषी नहीं हैं।

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