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Tata Workers Union : एक बुलंद आवाज जिसने ट्यूब डिवीजन से दूर किया भय

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कमेटी मीटिंग में वो सारे मामले उठाए जिस पर हर कोई था खामोश

ट्यूब में ट्रांसफर का भय दिखा एसएसएस लेने का अब दबाव नहीं

ये वही सरोज हैं जिन्हें सच बोलने पर एलडी टू से भेज दिया गया था ट्यूब

फतेह लाइव, रिपोर्टर.

टाटा स्टील के ट्यूब डिवीजन के कर्मचारियों के चेहरे अब भयभीत नहीं दिख रहे हैं. ट्यूब डिवीजन के गेट के बाहर शराब दुकानों में ट्यूब के कर्मचारियों की बैठकी भी थम गई लगती है. भय के वातावरण को खत्म करने में टाटा वर्कर्स यूनियन के पूर्व सहायक सचिव सह कमेटी मेंबर सरोज सिंह के योगदान की अनदेखी नहीं की जा सकती. टाटा वर्कर्स यूनियन की कमेटी मीटिंग में उनकी बुलंद आवाज ने ट्यूब डिवीजन में भय के माहौल को खत्म करने में अहम कारक की भूमिका निभाई.

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उन्होंने हाउस को ट्यूब डिवीजन के ताजा हालात से न सिर्फ अवगत कराया बल्कि यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी समेत सारे ऑफिस बेयरर्स को मजबूर किया कि वे इस मसले पर अपनी खामोशी तोड़े. खामोशी टूटी भी. टुन्नू चौधरी को बोलना पड़ा कि अब किसी कर्मचारी को जबरन एसएसएस लेने के लिए भयभीत किया गया तो इसे प्रबंधन का एकतरफा फैसला माना जाएगा और यूनियन इस मसले पर कड़ा स्टैंड लेगी.

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आरबीबी सिंह, रघुनाथ पांडेय, पीएन सिंह, आर रवि प्रसाद से लेकर संजीव चौधरी के यूनियन अध्यक्ष रहते सरोज सिंह की छवि एक जुझारू ट्रेड यूनियन लीडर की रही है. सहायक सचिव बनने के बाद नई भूमिका में खुद को ढालने में उन्हें भरसक मशक्कत करनी पड़ी. कारण कि उन्हें लंबे समय से विपक्षी राजनीति करने की आदत पड़ी हुई है. गलत हुआ तो सरोज सच को उजागर करने के लिए सदैव तैयार. उन्होंने इसकी भरपूर कीमत भी चुकाई है.

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एलडी टू में नौकरी कर रहे थे. वहीं एलडी टू जहां टाटा वर्कर्स यूनियन के दिग्गजों का जमावड़ा है. सच बोलने का साहस दिखाया तो सरोज सिंह को 2007 को ट्यूब डिवीजन का रास्ता दिखा दिया गया. ट्यूब डिवीजन में कमेटी मेंबर का चुनाव लड़े तो आसानी से जीत गए. उसके बाद जब भी सरोज सिंह हाउस में बोलने के खड़े होते थे तो यूनियन नेतृत्व तिलमिला जाता रहा है. सरोज सिंह कहते हैं, यदि आप किसी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं तो उनके हक में जायज बात बोलने का साहस भी रखना चाहिए.

खैर, ट्यूब डिवीजन की बात करें तो वहां स्पेशल सेपरेशन स्कीम लाया गया. वीआरएस और ईएसएस जैसी ही यह योजना कर्मचारियों के लिए लाई गई. परेशानी तब बढ़ी जब एसएसएस नहीं लेने पर टाटा स्टील के दूसरे प्लांट में तबादला करने की चेतावनी देने की बातें सार्वजनिक होती गई. यूनियन नेतृत्व बिल्कुल खामोश. ट्यूब डिवीजन के प्रभारी पदाधिकारी भी एक दम मौन. दो सप्ताह पहले कमेटी मीटिंग हुई तो सरोज सिंह की बुलंद आवाज ने इस सन्नाटे को भंग किया. इसके बाद दर्जनों कमेटी मेंबर भी ट्यूब के मसले पर मुखर हुए. कमेटी मीटिंग में सरोज सिंह ने ट्यूब के कर्मचारियों का दुखड़ा सुनाना शुरू किया तो पूरे हाउस का माहौल गमगीन हो गया था. उन्होंने बताया कि ट्यूब ने करोड़ों रुपए का निवेश कर ऐसी मशीनें लगाई गई है जिनका उपयोग नहीं किया गया.

उन्होंने बाकायदा इसकी सूची जारी की. बताया कि अदूरदर्शी तरीके से किए गए निवेश की सजा कर्मचारी भुगत रहे हैं. सरोज ने यूनियन के सभी ऑफिस बेयरर को अपने संबोधन की लिखित प्रति भी दी. ट्यूब पर कमेटी मेंबरों के रोष को टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी उर्फ टुन्नू भांप गए. उन्होंने कहा कि अब अति हुई तो इसे प्रबंधन का एकतरफा फैसला माना जाएगा. भारी विरोध होगा. कमेटी मीटिंग शुरू हुई तो अधिकतर कमेटी मेंबर ट्यूब डिवीजन के घटनाक्रम से बेहद क्षुब्ध नजर आए थे. यूनियन नेतृत्व की खामोशी से सबमें नाराजगी साफ दिख रही थी. यूनियन के पूर्व ऑफिस बेयरर सरोज सिंह ने सिलसिलेवार तरीके से ट्यूब डिवीजन के हालात को रखना शुरू किया तो पूरे हाउस का माहौल गंभीर हो गया था. टुन्नू समझ गए कि अब और टाला नहीं जा सकता. टुन्नू बोले कि सरोज सिंह ने जिस तरीके से लिखित तौर पर दस्तावेज दिए है, वो सबके लिए अनुकरणीय है. इससे प्रबंधन के साथ वार्ता में सहूलियत होगी.

सरोज ने उठाए ये मुद्दे

सितंबर 2023 में हुए कॉमन वेज स्ट्रक्चर के समझौता में दर्ज है कि ट्यूब डिवीजन में टाटा स्टील के कुल 493 कर्मचारी रहेंगे. ब्लॉक 4 के 27, ब्लॉक 3 के 197, ब्लॉक 2 के 269 पद रहेंगे। अभी ट्यूब में 400 कर्मचारी है. फिर एसएसएस के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृति के लिए दबाव बनाना समझ से परे है. समझौता को भी तोड़ना है.

चालू वित्तीय वर्ष के पहले दिन एक अप्रैल को ट्यूब के ईआईसी महोदय ने हर विभाग के केक कटिंग समारोह में कहा था कि इसी मैनपावर से कंपनी चलाई जाएगी. किसी को ट्यूब से बाहर नहीं भेजा जाएगा. सवाल है कि आखिर 7 महीने में ऐसी क्या परिस्थिति आ गई कि कर्मचारियों को यह दिन देखना पड़ रहा है.

2014 में ट्यूब के 198 कर्मचारियों से ट्यूब से जमशेदपुर प्लांट के दूसरे विभागों में भेजा गया था. तब सतीश सिंह और शाहनवाज आलम ट्यूब के प्रभारी पदाधिकारी थे. उस समय ट्यूब के कमेटी मेंबरों की प्रभारी पदाधिकारियों से विधिवत चर्चा हुई थी. यूनियन के टॉप थ्री की मौखिक सहमति के बाद तबादला हुआ था. इस बार कमेटी मेंबरों से चर्चा तक नहीं की गई. प्रभारी पदाधिकारी एक बार भी ट्यूब डिवीजन नहीं गए.

ट्यूब में करोड़ों का सुपर स्पेशलिटी एंबुलेंस बिना उपयोग के सड़ रहा है. पीटी थ्री इंच मिल के आधुनिकीकरण में करोड़ों खर्च. उपयोग शून्य. पीटी मिल्स के स्मार्ट वेयरहाउस का उपयोग नहीं हो रहा है. करोड़ों का हाइड्रो फॉर्मिंग मिल लगा. उखाड़ भी दिया गया. पीटी मिल्स में पार्थ कोल्ड ड्रा यूनिट लगाया गया. वो भी बंद. ऐसे अनेक उदाहरण है. कंपनी के करोड़ों खर्च हुए. लाभ नहीं मिला. उसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने पर मजबूर किया जा रहा है. कृपया कुछ करें.

ऐसा लगता है कि यूनियन नेतृत्व इतना कमजोर हो चुका है कि खुद किए गए कॉमन ग्रेड स्ट्रक्चर के समझौता का पालन कराने में असमर्थ है. भविष्य में टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में 8275 कर्मचारियों की संख्या को भी कायम रख पाना अब संभव नहीं लगता.

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