गठजोड़ की सूली में मालामाल हो रहे जिम्मेदार, रात के अंधेरे में अतिक्रमण का जिम्मेदार कौन, बागबेड़ा पुलिस या लैंड विभाग?
फ़ैल रहा अतिक्रमण, जमीन किसकी, तोड़ने वालों की या अतिक्रमण करने वालों की?
पीएम के नहीं आने और राष्ट्रपति के आने तक की वास्तुस्थिति करेगी बहुत कुछ बयां
फतेह लाइव, रिपोर्टर.
टाटानगर स्टेशन में इन दिनों सब कुछ खेल की रेल चल रही है. इसमें सफर करना हर किसी के बस की बात नहीं. क्यूंकि पीएम मोदी के विकास कार्य को ही यहां रेल पेल किया जा रहा है. लंबी बातें छोड़ देते हैं. बागबेड़ा टीओपी के पास अतिक्रमण बढ़ना इसका उदाहरण है. पिछले दिनों एक बड़े अधिकारी के आगमन पर आईजी की नजर को धोखा देने की कोशिश की गई. उनके आगमन पर चाईबासा बस स्टैंड के पास अतिक्रमण को खाली कराया गया, लेकिन टीओपी के पास स्थिति जस की तस बनी रही.

अब बात करें, अतिक्रमण की. करीब सात से आठ दशक बाद रेलवे स्टेशन को अमृत भारत योजना बनाने का विकल्प देश के प्रधानमंत्री ने दिया. उसके बाद स्टेशन के वर्षों पुराने लोगों को उजाड़ा गया. कोर्ट केस हुए. फिर रेलवे उसी जुगत में जा रही है या स्थानीय पुलिस उस योजना को चुनौती दे रही. यह सोचने वाली बात तो है ही, साथ ही प्रशासन के मुंह पर तमाचा है या फिर वह खेल जो, विकास की योजना को मुंह चिढ़ा रहा है. तस्वीरें खुद बयान करेगी.

पूर्व का खेल और अब का खेल, फतेह लाइव में जल्द.
नोट : ऊपर ये वह तस्वीरें हैं जहां रात भर अतिक्रमण चल रहा है और लैंड विभाग और बागबेड़ा पुलिस नदारद है. जहां स्टेशन का विस्तार चल रहा है और गोलपहाड़ी चौक तक जाम हो रहा है. इन अतिक्रमणकारियों पर अगर लैंड विभाग या बागबेड़ा पुलिस ध्यान नहीं देती है तो आने वाले समय में फिर नेतागिरी, कोर्ट कचहिरी लाजमी है. भुगतेगा आम जन.
















