वर्दी में हेलमेट पहनकर क्यों चलाई गई लाठियां, ये भी बड़ा सवाल
फतेह लाइव, रिपोर्टर।
जमशेदपुर में रात्रि गश्ती के वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी दुकानों और सड़कों पर मौजूद लोगों को हटाते और लाठियां चलाते नजर आ रहे हैं। अपराध नियंत्रण जरूरी है, लेकिन आम नागरिकों को पीटना किसी भी स्थिति में समाधान नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी, ये कैसी कार्रवाई है? पुलिस द्वारा अपने नकारेपन को छुपाने और अपराधियों पर लगाम लगाने के नाम पर आम जनता पर ही लाठियां क्यों बरसाई जा रही हैं?
जनता को पीटने से अपराध खत्म नहीं होगा। कार्रवाई करनी है तो भ्रष्ट और अपराधियों से मिलीभगत करने वाले पुलिसकर्मियों पर कीजिए। अगर ऐसी सख्ती ईमानदारी से भ्रष्ट पुलिसकर्मियों और अपराधियों पर हो, तो झारखंड की तस्वीर बदल सकती है।
क्या सरकार चाहती है कि आम आदमी शाम होते ही अपने घरों में दुबक जाए? ऐसी कार्रवाई तो लोगों को लालू राबड़ी के पुराने ‘जंगलराज’ की याद दिला रही है। बेहतर होगा कि पूरे राज्य में चार बजे के बाद कर्फ्यू ही लगा दीजिए..फिर पुलिस को कोयला, बालू और पत्थर के अवैध कारोबार को ‘सुरक्षा’ देने के लिए पूरा समय मिल जाएगा और भ्रष्ट तंत्र की कमाई भी चलती रहेगी। मुख्यमंत्री जी, अपराधियों पर सख्ती कीजिए, आम जनता पर नहीं। जनता को सुरक्षा चाहिए, लाठी नहीं।
ये सोशल मीडिया में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के कहे गए हू ब हू कथन है, जिसे अपने पड़ा और समझा। अब बात करते हैं शनिवार रात बिष्टुपुर थाना पुलिस के वायरल हो रहे वीडियो की। जहां तक सवाल सबसे बड़ा है अगर पुलिस यह कार्रवाई कर रही थी तो हेलमेट पहनकर क्यों की गई? अपराधी भी इसी तरह बैंक लूट कर चले जाते हैं?
क्या पुलिस अपराधी वाला रोल अपना रही थी, आम जन पर? दुकानदार को जिस तरह धमकाया गया इससे पूरे शहर में एक ख़राब संदेश गया है, खासकर दुकानदारों में। दुकानदारों और पब्लिक का एक ही कहना है खिसयाई बिल्ली खम्भा नोचे। अपराध पर लगाम नहीं लगा पाने का यह दर्द जनता पर थोपना चहूँ ओर हाय तौबा मचा रहा है। अब देखना यह है कि विभिन्न थाना में कितने दिन तक कोई अपराधिक Fir नहीं आती है?




































