Jamshedpur district council : कीताडीह में ग्रामीणों का बवाल, जिला परिषद फंड से जनता को मिलने वाली सुविधा में हुई खेला, देखें – Video

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 दूसरी बोरिंग करने की आई नौबत, संवेदक हर्षवर्धन सिंह के कारनामे की स्थानीय ग्रामीणों ने खोली पोल, कविता परमार का है इलाका 

कनीय अभियंता विजय भूषण पर उठ रही उंगलियां, नहीं उठाते फोन, नहीं आये निरीक्षण करने

चरणजीत सिंह. 

झारखंड सरकार की विकास सम्बन्धी योजनाओं में लूट खसोट मची हुई है. सरकार के मुलाजिम सरेआम इस लूट खसोट का हिस्सा बने हुए हैं. कहा जाये तो जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने में मस्त है. ऐसा ही एक मामला जमशेदपुर में फिर सामने आया है. आप यह जान लें कि किस तरह जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने का मामला है. जानकारी के अनुसार उत्तरी कीताडीह पंचायत अंतर्गत कीताडीह पोस्ट ऑफिस के पास लगभग तीन माह पहले सोलर पंप लगाने की योजना स्थानीय जिला परिषद कविता परमार की अनुशंसा पर लाई गई. 6 लाख 65 हजार इसमें खर्च करने के लिए पास हुए. इसके बाद यहां 240 फीट बोरिंग संवेदक ने करा दी, जो हर्षवर्धन सिंह है. नियमता उस आवंटित फंड से 500 फीट बोरिंग होनी चाहिए थी. ग्रामीणों ने बवाल मचाया और मोटर नहीं लगाने दी.

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संवेदक ने ग्रामीणों को बताया 370 फीट बोरिंग है. ग्रामीणों ने इसकी नापी करा दी और बोरिंग 240 फीट निकली. सूत्रों के अनुसार इस तीन माह में संवेदक जिला परिषद के वरीय जनप्रतिनिधि के करीबी व्यक्ति के साथ मिलकर विरोध करने वाले को मैनेज करते रहा. बीते मंगलवार को यहां फिर विवाद हो गया, क्यूंकि मैनेज करने में स्थानीय नेताओं को तो वह बाजी मार गया, लेकिन ग्रामीण बेवकूफ नहीं बने.

मंगलवार की रात हुई दोबारा बोरिंग का प्रमाण

हाईवोल्टेज ड्रामे के बीच रात को दूसरे स्थान पर 475 फीट अलग से बोरिंग की गई. इससे मामला भले ही एन केन प्रकरण रफा दफा होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि जिला परिषद में भ्रष्टाचार जोरों पर हावी है. यह भी कहा जाता है कि सोलर पंप लगाने में जो स्टैंड लगाए गए हैं. वह भी निम्न कोटि के हैं, जो ज्यादा समय तक नहीं टिक सकते. इसके साथ ही संवेदक द्वारा कार्यस्थल पर योजना बोर्ड भी नहीं लगाया गया है, जिससे योजना पारदर्शी हो, इससे जनता में असमंजस बना हुआ रहता है कि यह योजना किस मद की है.

इस पूरे मामले की देखरेख करने का जिम्मा कनीय अभियंता विजय भूषण का है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि वह पूरे योजना कार्य के दौरान एक बार भी निरिक्षण करने नहीं आये. उन्हें फोन करने पर वह उठाते भी नहीं हैं. ये कनीय अभियंता विजय भूषण 20 सालों से जमशेदपुर प्रखंड में पदस्थापित हैं और 2007 से पूर्व भी पोटका समेत जिले में अपना समय बिता चुके हैं.

उनकी उच्च पहुंच को देखते हुए स्थानीय उनके उच्च अधिकारी भी उनकी कार्यशैली को नजर अंदाज करते हैं, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है और सरकार की छवि धूमिल हो रही है. बहरहाल, यह मामला भी दूसरे घोटालों की तरह दब जाता है या फिर इसकी जांच होकर जनता के बीच बेहतर छवि को वरीय अधिकारी लाते हैं, इस पर कीताडीह के साथ साथ आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं.

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