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Jamshedpur : श्रेष्ठ हिन्दी शिक्षक सम्मान से सम्मानित होंगे वरिष्ठ शिक्षक अनिरुद्ध त्रिपाठी ‘अशेष’

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12 सितंबर को हिन्दी शिक्षक कार्यशाला में मिलेगा सम्मान, अंगवस्त्र, सम्मान पत्र, श्रीफल, स्मृति चिह्न और 11 हजार रुपये का चेक प्रदान किया जाएगा

फतेह लाइव, रिपोर्टर।

सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन की कार्यकारिणी ने इस वर्ष के श्रेष्ठ हिन्दी शिक्षक सम्मान के लिए वरिष्ठ शिक्षक एवं साहित्यकार अनिरुद्ध त्रिपाठी ‘अशेष’ के नाम का चयन किया है। यह सम्मान 12 सितंबर को आयोजित होने वाली हिन्दी शिक्षक कार्यशाला के दौरान प्रदान किया जाएगा। सम्मान के रूप में उन्हें अंगवस्त्र, सम्मान पत्र, श्रीफल, स्मृति चिह्न तथा 11 हजार रुपये की राशि का चेक प्रदान किया जाएगा।

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साहित्य और अध्यापन के क्षेत्र में लंबा योगदान

8 अक्टूबर 1959 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बड़हल गंज थाना क्षेत्र के मोहन पौहरिया गांव में जन्मे अनिरुद्ध त्रिपाठी ‘अशेष’ ने हिन्दी शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने 1987 से 2018 तक जमशेदपुर में शिक्षण कार्य किया।

उनकी शैक्षणिक योग्यता में कला स्नातक, शिक्षा स्नातक, संस्कृत साहित्य में आचार्य तथा कला में स्नातकोत्तर की उपाधियां शामिल हैं। अध्यापन के साथ-साथ वे हिन्दी और भोजपुरी में कविता, कहानी, निबंध, समीक्षा एवं संस्मरण आदि विधाओं में स्वतंत्र लेखन करते रहे हैं।

‘अशेष’ आध्यात्मिक विषयों पर भी व्याख्यान देते रहे हैं। देश के विभिन्न नगरों में उन्होंने श्रीरामचरितमानस और श्रीमद्भगवद्गीता सहित विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर व्याख्यान दिए हैं।

साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं से जुड़ाव

अनिरुद्ध त्रिपाठी ‘अशेष’ वर्तमान में विश्व भोजपुरी सम्मेलन की झारखंड इकाई के प्रांतीय अध्यक्ष, जमशेदपुर भोजपुरी साहित्य परिषद के उपाध्यक्ष तथा हिन्दी साहित्य-कला परिषद, जमशेदपुर के महासचिव सहित विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। वे ‘जमशेदपुर मानस विद्यापीठ’ के संस्थापक तथा ‘प्रज्ञा भारती’ सांस्कृतिक समन्वय संस्थान के संस्थापक महासचिव भी रहे हैं।

हिन्दी और भोजपुरी भाषा-साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनमें साहित्य सेवी सम्मान, हिन्दी सेवी सम्मान, हिन्दी-भोजपुरी सेवा सम्मान, के.के. सिंह स्मृति सम्मान, हिन्दी रत्न सम्मान, सरयू रत्न सम्मान तथा आचार्य विद्यानिवास मिश्र लोककवि सम्मान प्रमुख हैं। उन्हें ‘विद्यावाचस्पति’ की उपाधि भी प्राप्त है।

कई महत्वपूर्ण कृतियां प्रकाशित

‘अशेष’ की प्रकाशित कृतियों में भोजपुरी महाकाव्य ‘प्रेमायन’, भोजपुरी प्रबंध काव्य ‘धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे’, ‘श्रीरामचरितमानस में क्रियायोग’, ‘क्रियायोग गीतावली’, ‘श्रीहनुमानचालीसा : एक दृष्टि’, ‘मानस के आलोक में अष्टावक्रगीता : एक मीमांसा’ तथा ‘भोर गढ़ता संवाद’ प्रमुख हैं।

सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन की ओर से उनके चयन को हिन्दी शिक्षण और साहित्य के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

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