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JPSC-JSSC Paper Leak: 500 OMR शीट से लेकर 10 लाख की डील तक, अभय तिवारी के नेटवर्क ने खोले परीक्षा घोटाले के कई राज

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CID की केस डायरी में चौंकाने वाले दावे, दो परीक्षाओं की करीब 500 OMR शीट में छेड़छाड़ की बात; JSSC CGL के 25 सफल अभ्यर्थियों से भी हुई पूछताछ

फतेह लाइव, रिपाेर्टर। 

झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, जांच एजेंसियों के सामने एक के बाद एक नई कड़ियां सामने आ रही हैं। JPSC और JSSC परीक्षा अनियमितता मामलों में CID ने अभय तिवारी को कथित मास्टरमाइंड बताया है। कोर्ट में पेश की गई केस डायरी में जांच एजेंसी ने परीक्षा प्रक्रिया, OMR शीट, कथित पैसों के लेन-देन और परीक्षा संचालन एजेंसी से जुड़े कई अहम बिंदुओं का उल्लेख किया है।

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CID के अनुसार, JPSC की दो परीक्षाओं में करीब 500 OMR शीट में छेड़छाड़ किए जाने के तथ्य जांच में सामने आए हैं। वहीं JSSC CGL मामले में जांच का दायरा सफल अभ्यर्थियों तक भी पहुंच गया है। गुरुवार को SIT ने 25 सफल अभ्यर्थियों को बुलाकर पूछताछ की।

फ्लैट से शुरू हुई कहानी, साले के नाम पर हुआ लीज एग्रीमेंट

जांच में लखनऊ की एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) का कनेक्शन भी सामने आया है। CID के मुताबिक, लालपुर स्थित जिस फ्लैट से TDPL का काम संचालित होता था, उसका लीज एग्रीमेंट अभय तिवारी के साले सौरभ पांडेय के नाम पर किया गया था।

फ्लैट की मालकिन रेखा देवी के बयान का हवाला देते हुए CID ने कोर्ट को बताया कि इस व्यवस्था में अभय तिवारी की भूमिका सामने आई है। जांच एजेंसी ने इसी फ्लैट से अभय के TDPL कर्मचारी होने का आई कार्ड बरामद करने की बात भी कही है।

जांच के मुताबिक TDPL के निदेशकों के रांची आने-जाने और ठहरने का खर्च भी अभय तिवारी द्वारा वहन किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। होटल भुगतान के लिए UPI लेन-देन को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया गया है।

UPI ट्रांजैक्शन और लीज पेपर बने जांच के अहम सुराग

CID ने कोर्ट में कहा है कि TDPL को नामांकन के आधार पर काम दिलाने में अभय तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। जांच एजेंसी ने UPI भुगतान और लीज एग्रीमेंट को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर दर्ज किया है। केस डायरी के अनुसार, JPSC 2025 PT परीक्षा में 24 अभ्यर्थियों को जुटाने की बात सामने आई है। इनमें से 11 अभ्यर्थियों द्वारा कथित तौर पर 10-10 लाख रुपये दिए जाने और रकम अभय तिवारी तक पहुंचने की बात जांच में सामने आई है। धर्मेंद्र कुमार के बैंक खातों से मिले तथ्यों के साथ-साथ TDPL निदेशक रामवीर सिंह और अभय तिवारी के बयानों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।

पांच परीक्षाएं पास करने का दावा बना अभ्यर्थियों को फंसाने का हथियार

CID की जांच में अभय तिवारी की कथित कार्यशैली को लेकर भी कई बातें सामने आई हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, वह JSSC CGL के जरिए सरकारी सेवा में आया था और उसने अलग-अलग पांच परीक्षाएं भी पास की थीं। इसी उपलब्धि को वह कथित तौर पर अपनी ‘केस स्टडी’ के रूप में अभ्यर्थियों के सामने पेश करता था। जांच के मुताबिक, वह अभ्यर्थियों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश करता था कि उसके संपर्क और प्रभाव के जरिए परीक्षा में सफलता हासिल की जा सकती है।
यही कथित प्रभाव बाद में अभ्यर्थियों को अपने संपर्क में लाने और उनसे पैसे लेने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

दो दिन की रिमांड में अभय, जांच एजेंसियां खंगाल रही हैं पूरा नेटवर्क

JSSC CGL मामले में CID ने अभय तिवारी को दो दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया है। वहीं JPSC परीक्षा धांधली मामले में पूर्व आयोग अध्यक्ष के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार तथा TDPL के दो कर्मचारियों प्रदीप सिंह और संजय को तीन दिनों की रिमांड पर लिया गया है।

गुरुवार को CID मुख्यालय में अभय तिवारी से कई घंटे पूछताछ हुई। शुक्रवार को भी पूछताछ जारी रहने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब कथित परीक्षा सेटिंग के नेटवर्क, बिचौलियों, पैसों के लेन-देन और सफल अभ्यर्थियों से जुड़े संपर्कों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

500 OMR शीट से लेकर करोड़ों के सवाल तक, जांच के आगे कई परतें

JPSC की करीब 500 OMR शीट में कथित छेड़छाड़, अभ्यर्थियों से रकम लेने के आरोप, TDPL से जुड़े दस्तावेज और UPI ट्रांजैक्शन जैसे बिंदुओं ने मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, इन सभी आरोपों और दावों की अंतिम पुष्टि अदालती प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल CID की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह मामला झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और परीक्षा संचालन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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