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Terror Alert: कश्मीर में आतंक का नया खेल! बड़े हमलों से दूरी, अब छोटे वार कर दहशत फैलाने की तैयारी

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खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट के बाद अलर्ट बढ़ा, ऑनलाइन प्रोपेगेंडा से स्थानीय युवाओं को जोड़ने की कोशिश; जम्मू के पहाड़ी इलाकों पर भी नजर

फतेह लाइव, रिपाेर्टर। 

जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठनों की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। खुफिया सूचनाओं के मुताबिक, पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन अब किसी बड़े हमले की बजाय छोटे-छोटे हमलों के जरिए सुरक्षा तंत्र पर दबाव बनाने और लोगों में भय का माहौल पैदा करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके मद्देनजर कश्मीर घाटी के साथ जम्मू संभाग के दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में भी आतंकवाद विरोधी अभियान तेज किए गए हैं।

तीन मोर्चों पर आतंकी नेटवर्क की सक्रियता

सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के अनुसार आतंकी नेटवर्क की गतिविधियां मुख्य रूप से तीन स्तरों पर केंद्रित हैं—ऑनलाइन दुष्प्रचार, स्थानीय युवाओं की कथित भर्ती और छोटे हमलों की योजना। एजेंसियों का मानना है कि सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल माध्यमों के जरिए ऐसे युवाओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जिनका पहले से कोई आपराधिक या पुलिस रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे युवाओं को नेटवर्क में शामिल करने का उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों की पारंपरिक निगरानी से बचना बताया जा रहा है।

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हमलों के बीच अंतर रखने की रणनीति

खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, संभावित हमलों के बीच पर्याप्त अंतर रखने की रणनीति अपनाई जा सकती है, ताकि घटनाएं किसी एक बड़े आतंकी अभियान के बजाय अलग-अलग वारदातों जैसी दिखाई दें। इनपुट में यह भी सामने आया है कि नए लोगों को सीधे संगठन के शीर्ष नेटवर्क से जोड़ने के बजाय कई स्तरों के संपर्कों के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है। सुरक्षा एजेंसियां ऐसे संदिग्ध नेटवर्क और उनकी गतिविधियों की निगरानी कर रही हैं।

पुलिसकर्मी, अल्पसंख्यक और प्रवासी श्रमिक निशाने पर?

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, कुछ आतंकी मॉड्यूल स्थानीय पुलिसकर्मियों के अलावा कश्मीरी हिंदुओं और प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। महिलाओं और परिवारों को धमकी दिए जाने की सूचनाओं को भी एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों के पीछे केवल हिंसा फैलाना ही नहीं, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच भय और अविश्वास का माहौल पैदा करना भी उद्देश्य हो सकता है।

जम्मू के पहाड़ी इलाकों पर भी निगाह

सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू संभाग के ऊंचाई वाले और दुर्गम इलाकों को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई है। आशंका है कि आतंकी इन क्षेत्रों में घात लगाकर सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी कारण संवेदनशील क्षेत्रों में तलाशी अभियान, निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

ऑनलाइन धमकियों ने बढ़ाई चिंता

सुरक्षा एजेंसियों की नजर उन ऑनलाइन अभियानों पर भी है, जिनमें धमकी और आतंक समर्थित प्रचार सामग्री प्रसारित किए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे डिजिटल अभियानों का इस्तेमाल युवाओं को प्रभावित करने, कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेलने और समाज में भय पैदा करने के लिए किया जा सकता है।

घुसपैठ की आशंका के बीच बढ़ी चौकसी

सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि भविष्य में पाकिस्तान से आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश भी की जा सकती है। एजेंसियां एक ओर सीमा पार गतिविधियों पर नजर रख रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क, ऑनलाइन गतिविधियों और हथियारों की संभावित आवाजाही की जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल सुरक्षा तंत्र का फोकस इस बात पर है कि छोटे हमलों और डिजिटल दुष्प्रचार के जरिए जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता पैदा करने की किसी भी कोशिश को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।

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